
उरई। सूखा और पलायन के लिए सुर्खियों में रहने वाले बुंदेलखंड के जालौन जनपद को लेकर एक पहलू ऐसा भी है जिससे लोग चैंक पड़ेगें। इस कदर गरीबी और बेरोजगारी के होते हुए भी इस जनपद के शौकीनों का मिजाज अभी भी बुलंद है। जिसकी गवाही आबकारी विभाग के शराब की बिक्री के आंकड़े देते हैं।
जिला आबकारी अधिकारी केपी यादव के मुताबिक जालौन जिले में देशी शराब के ठेकों से लोग हर महीने 2 लाख 50 हजार लीटर दारू खरीद कर पी जाते हैं। अंग्रेजी शराब की बिक्री भी कम नही है। हर महीने 1 लाख अंग्रेजी शराब की बोतल और सवा लाख बियर की बोतलें खरीदी जाती है।
जिला आबकारी अधिकारी के मुताबिक हर महीने जिले में 15 करोड़ रुपये की देशी और अंग्रेजी शराब बिकती है। शराब के शौकीनों का सरकारी खजाने का मालामाल रखने में भी बड़ा हाथ है। उन्होंने बताया कि हर साल 165 करोड़ रुपये का राजस्व जिले में शराब की बिक्री से सरकार को मिलता है।
गौरतलब है कि जितनी बिक्री सरकारी ठेकों से होती है उससे कहीं ज्यादा खपत दूसरे प्रांतों से तस्करी करके लाई जाने वाली शराब की जिले में कई वर्षों से हो रही है। क्योंकि तस्करी की शराब ठेके की शराब से सस्ती पड़ती है। शराब की तस्करी करने वाले दर्जनों पेशेवर माफिया इसके चलते कई करोड़ के आसामी बन चुके हैं। इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें दर्जनों बार पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन वे जमानत पर छूटकर आने के बाद फिर इस धंधे में लग जाते हैं। हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि यूपीकोका के प्रभावी होने के बाद इन माफियाओं की शामत आ जायेगी और इसके बाद काफी हद तक शराब की तस्करी के धंधे की रोकथाम हो सकेगी।





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