कालपी-उरई । प्रथम क्रान्ति 1857 की अग्रदूत पौराणिाक एंव धार्मिक नगरी कालपी शहर आज भी बुनियादी सुविधाओं से बंचित होने के कारण यहां का नागरिक तमाम बुनियादी सुबिधाओं से बंचित है।
कालपी नगरी जिसकी आवादी लगभग 50 हजार से अधिक है इस नगर में रोजगार के साधन न होने के कारण यहां का 80 प्रतिशत युवक एवं युवतियां कालपी से पलायन करके दिल्ली, मुम्बई, भोपाल, कानपुर, कोलकाता, गुजरात आदि में मजदूरी करके अपना जीवकोपार्जन कर रहा है। इस नगर में उद्योग धन्धों का अभाव है कहने को इस शहर में 60-70 हाथ कागज इकाईयां है जो कागज बनाती है लेकिन मोटा कागज जैसे फाईल कवर, गत्ता, निमंत्रत्रण कार्ड बनाने और उनका पर्याप्त मार्केट न होने के कारण ये उद्योग धीरे-धीरे रसातल को जा रहा है। केन्द्र सरकार एंव प्रदेश सरकार की उपेक्षा पूर्ण नीति के कारण ये लघु उद्योग बढ़ी हुई बिजली की दरों, महंगा मेटेरियल के कारण उत्पादन लागत बढ़ जाने तथा बिक्री लागत घट जाने के कारण ये उद्योग धीरे-धीरे घाटे में जाने से बन्द होने की कगार पर है। इस शहर में एक सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र है जंहा पर पर्याप्त डाॅक्टर न होने के कारण मरीजो का इलाज नही हो पाता है इतना ही नही यह अस्पताल मात्र रिफर केन्द्र बन गया है। कोई मरीज ज्यादा बीमार हुआ तो डाक्टर साहब तुरन्त कानपुर या झांसी के लिये रिफर कर देते है।
तत्कालीन कृषि मंत्री चौ. शंकर सिंह ने इस अस्पताल का निर्माण इस लिये कराया था कि कालपी क्षेत्र के मरीजो का इलाज कालपी में ही हो सके। लेकिन यहां पर पर्याप्त डाक्टर न होने के कारण यह अस्पताल सफेद हाथी बना खड़ा है। इतना ही नही इस नगरी में शिक्षा केन्द्रों का भी अभाव है शहर में उच्चशिक्षा के महाविद्यालय तो है लेकिन साइंस, कम्प्यूटर, की शिक्षा के साधन न होने के कारण यहां का छात्र नयी तकनीकि की शिक्षा लेनेे हेतु उरई, कानपुर जाता है जो अभिवावक बाहर भेजने का खर्चा बहन नही कर पाते है के बच्चे मात्र बीए., एमए, करके घर बैठ जाते है क्योंकि बिना तकनीकि शिक्षा के आज के युग में कोई भी पढ़ा लिखा छात्र नौकरी नहीं पा सकता है। इस कालपी क्षेत्र का यह भी दुर्भाग्य ही कहा जावेगा कि यहां से श्रीरामपाल विधायक बने, मंत्री बने, चै. शंकर सिंह मंत्री बने लेकिन कोई ऐसी बड़ी बुनियादी नही डाली गयी जिससे यहां के लोगो को रोजगार मिलता सांसदों ने तो कालपी के लिये कभी कुछ सोचा तक नही करना तो बहुत दूर की बात है। आखिर कब तक यह नगरी विकास के लिये तड़फती रहेगी, यह तो ईश्वर ही बता सकता है।





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