कोंच-उरई । ड्राप आउट बच्चों को स्कूल में नियमित रूप से भेजने में एसएमसी की प्रमुख भूमिकायें हैं, यह सभी के सहयोग से ही संभव है। बाल अधिकार एवं विकास में विद्यालय प्रबंध समितियों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है, यह तभी संभव है जब विद्यालय प्रबंध समितियों का चयन सहभागी प्रशिक्षण व प्रजातंत्रात्मक व्यवस्था के अनुरूप हो तथा समस्त हितगामी/ स्टेकहोल्डरों का सकारात्मक सहयोग व सहभागिता हो। यह बात विद्यालय प्रबंध समितियों के प्रतिनिधियों के द्वारा तहसील में अपने अपने गांवों के प्राथमिक स्कूलों की समस्याओं की लिखित शिकायतों के देने के बाद जिला स्तरीय बाल अधिकार एवं विकास समन्वय कोलिसन ऑन चाइल्ड राईट एंड डेवलपमेन्ट (सीसीआरडी) फोरम जालौन के समन्वयक समर्पण जन कल्याण समिति के निदेशक राधेकृष्ण ने व्यक्त किये।

प्राथमिक विद्यालयों व विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष अशोककुमार द्वारा सुरक्षित पेयजल के लिये शौचालय से दूर हैंडपंप लगवाने व ड्रापआउट बच्चों की सहित मांग रखी, वहीं देवगांव के कन्या प्राथमिक विद्यालय के हरिमोहन ने विद्यालय में बाउन्ड्रीवाल बनवाने की मांग का आवेदन किया तथा कहा कि छोटी बच्चियों के साथ कभी भी स्कूल से सटे गहरे तालाब से बड़े हादसे हो सकते हैं, इनसे बचाने के लिये मांग रखी। बरहल ग्राम के प्राथमिक विद्यालय के एसएमसी अध्यक्ष संतराम कुशवाहा ने ड्राप आउट बच्चों को स्कूल भिजवाने में विभाग व पंचायत का सहयोग करने तथा बाउन्ड्री बाल बनवाने की ग्राम चटसारी प्राथमिक विद्यालय के एसएमसी अध्यक्ष सत्यप्रकाश ने बाडन्ड्रीवाल व अतिरिक्त दो शिक्षकों की नियुक्ति तथा ड्राप आउट बच्चों के लिये विभागीय सहयोग की मांग की गयी। सलैया बुजुर्ग के प्राथमिक विद्यालय के एसएमसी अध्यक्ष उमाचरण ने बच्चों को सुरक्षित खेल के मैदान व ड्राप आउट बच्चों के लिये सहयोग करने की लिये आवेदन किया गया ताकि ये सभी विद्यालय मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित किये जा सके। सभी ने एसएमसी पंचायत स्थानीय जनसंगठन व अन्य स्टेकहोल्डरों के साथ मिलकर काम करने व मीडिया के सहयोग की अपेक्षा की इस अवसर पर बेहतर शिक्षा के लिये समर्पण के कार्यकर्ता बलवीरसिंह, जुवैदउद्दीन, गोविंद आदि फोरम से जुड़े व्यक्ति मौजूद रहे।

 

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