उरई। पहचान की राजनीति के परचम को थामकर धूमकेतु की तरह रातों-रात चर्चाओं के क्षितिज पर चमके संगठन जीएसफोर के तत्वावधान में गुरुवार को संत गाडगे जी महाराज का परिनिर्वाण दिवस श्रद्धा और समर्पण के भाव से मनाया गया।
संत गाडगे श्रीवास समाज सेवा समिति को लोग जीएसफोर के संक्षिप्त नाम से जानते हैं। जाति विशेष की लामबंदी करके नई सामाजिक ताकत के रूप में उभरे इस संगठन की सक्रियता से परंपरागत संगठनों में खलबली मची हुई है। जीएसफोर ने आज संत गाडगे का परिनिर्वाण दिवस मनाया। इसके तहत संगठन के कार्यकर्ता जिला चिकित्सालय और नेत्रहीन बालकों के स्कूल में फल वितरण के लिए पहुंचे।
बाद में सन बायज हास्टल में गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें वक्ताओं ने कहा कि संत शिरोमणि गाडगे महाराज ने ही सबसे पहले स्वच्छता का संदेश दिया था। जिसका अनुकरण सरकार से लेकर राजनैतिक पार्टियां आज के दौर में कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर के गुरू रहे संत गाडगे ने भी वंचित समाज से स्वाभिमान के साथ जीने के लिए शिक्षा का मजबूत सहारा पकड़ने की अपील की थी। आज उनके बताये इस रास्ते पर और तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है।
सभा की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष अजय प्रकाश ने की। उन्होंने कहा कि संत गाडगे ने नशा मुक्ति पर जोर दिया था। उनके वंशजों को अपनी कौम के महापुरुष की इस वाणी का अक्षरशः पालन करना चाहिए। नशे से शारीरिक और भौतिक दोनों तरह की क्षति होती हैं। किसी समाज या व्यक्ति को आगे बढ़ना है तो उसे नशे को दूर से ही नमस्ते करने की ठाननी होगी। गोष्ठी में डाॅ. राजेश, डीपी सर, महेंद्र श्रीवास एडवोकेट, दीपक कोटरा, शैलेंद्र श्रीवास सभासद, मानसिंह श्रीवास सभासद, कमल वर्मा, महेंद्र वर्मा, मुकेश बम्हौरी, कृपाराम कोटेदार कैथ, चंद्रप्रकाश, रामबाबू, लालसिंह, रामनारायण प्रधान मनीष आनंद, जीपी वर्मा, सोहन, चच्चू, अखिलेश श्रीवास, सुंदर शास्त्री आदि ने भी विचार प्रकट किये।






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