उरई। काकोरी कांड के शहीदों की याद में शुक्रवार को शहर की सड़कों पर साम्प्रदायिकता विरोधी मार्च निकाला गया। इस दौरान गोष्ठी भी आयोजित हुई जिसमें कहा गया कि आजादी की लड़ाई की सारे शहीदों ने देश के हिन्दुओं और मुसलमानों को भाई बताते हुए उनकी एकता के लिए काम करने कर आवाहन किया था। इसलिए यह साफ है कि जिनका हिन्दु-मुस्लिम भाई चारे में विश्वास नही है शहीदों के लिए उनकी दुहाई स्वीकार नही की जा सकती। अंग्रेज फूट डालों और राज करों की नीति अपनाते थे, एकता के मामले में शहीदों के विरोध में काम करने वाली ताकतों को अंग्रेजों की नाजायज औलाद के रूप में चिन्हित किया जाना चाहिए।

काकोरी कांड के क्रांति नायकों की शहादत के 90 वर्ष इस 22 दिसम्बर को पूरे हो गये हैं। नौजवान भारत सभा ने इस उपलक्ष्य में आज एकता मार्च निकाला जो जिला परिषद से शुरू होकर अंबेडकर चैराहा, गांधी चबूतरा, भगत सिंह पार्क, बजरिया, कोंच बस स्टैण्ड से होता हुआ चुर्खी बाईपास पर पहुंचा और सभा में परिवर्तित हो गया।

नौजवान भारत सभा के बृजेश ने काकोरी कांड के अमर शहीद रामप्रसाद विस्मिल को उद्धृत करते हुए बताया कि उन्होंने फांसी पर लटकने के पहले कहा था कि अगर देशवासियों को जरा भी उनकी मौत का अफसोस हो तो वे हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कोई कसर न छोड़ने की शपथ लें। गरम दल के नेता अतुल कुलश्रेष्ठ बच्चा ने इसी कड़ी में बताया कि अशफाक उल्ला का भी कहना था कि न तो यह हो सकता है कि 25 करोड़ हिन्दुओं को धर्म परिवर्तित कर मुसलमान बनाया जा सके और नही ही यह संभव है कि 7 करोड़ मुसलमानों का शुद्धीकरण कर उन्हें हिंदुओं में शामिल किया जा सके। जब दोनों को अलग-अलग पहचानों के साथ एक ही जगह रहना है तो वे आपस में मारकाट मचाने की बजाय एकता का शानदार गुलदस्ता क्यों न आपसी संबंधों से बनायें।

इस दौरान देश को आगे बढ़ाओं नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया और क्रांतिकारी गीत गाये गये। अभिषेक, तेज सिंह, अमित, सत्यम, यतेंद्र, का. धर्मेंद्र, का. हरीशंकर, मुलायम सिंह, प्रिंस, प्रखर, लक्ष्मी, अंजली, अरुंधति, प्रसेन, अविनाश, राजू और नेहा आदि जुलूस में शामिल रहे।

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