
0मिशनरी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से ही पार्टी के दुर्दिनों की शुरूआत
उरई।बहुजन समाज पार्टी की बहुप्रतीक्षित बैठक पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के आवास पर पार्टी के बुंदेलखंड प्रभारी गयाचरन दिनकर की उपस्थित में जैसे ही शुरू हुयी वैसे ही पार्टी जिलाध्यक्ष शैलेंद्र शिरोमणि की निष्क्रियता को लेकर कार्यकर्ता भड़क उठे। इस बीच उन्होंने जिलाध्यक्ष पर एक के बाद एक अनेकों आरोपों की झड़ी लगाते हुये मांग की कि यदि पार्टी हाईकमान ने जिलाध्यक्ष को नहीं बदला तो आने वाले चुनावों में भी पार्टी को इसी तरह से दुर्दिन देखने पड़ सकते हैं।
पूर्व सांसद के आवास पर आहूत बैठक में जैसे ही मुख्य अतिथि पहुंचे वैसे ही पहले से ही उनके आने का इंतजार कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा भड़क उठा और वह जिलाध्यक्ष शैलेंद्र शिरोमणि को हटाये जाने की मांग पूरे जोरशार से उठाते हुये नये जिलाध्यक्ष के नाम सुझाये जिसमें जगजीवन अहिरवार, सुलेमान, कैलाश राजपूत, मूलशरण कुशवाहा, हीरालाल चैधरी, पूरन प्रजापति व शहीद अली का नाम शामिल रहा। बैठक में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग रखी कि वर्ष 1990 से पार्टी की मजबूती के लिये काम करने वाले मिशनरी कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन में प्राथमिकता से महत्व दिया जाये। तो वहीं अनेकों कार्यकर्ताओं का कहना था कि पहले के समय में पार्टी कैडर कैंप आयोजित करती थी। लेकिन लंबे समय से यह प्रक्रिया बंद है। इस तरह के कैंप आयोजित न होने से बूथ स्तरीय कार्यकर्ता निष्क्रिय हो गये। कार्यकर्ताओं का यह भी कहना था कि चुनावों के दौरान अनेकों नेता प्रकट हो जाते हैं और पार्टी की बैठकों में माला डलवाते हैं और पार्टी के सिम्बल पर चुनाव लड़ते हैं। लेकिन इसके बाद ऐसे नेताओं का चेहरा खोजने के बाद भी नहीं दिखायी देता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में नगर निकाय चुनावों में भी अनेकों नेता पार्टी मंच पर देखे जाते हैं लेकिन वह आज की बैठक से गायब हैं। क्या ऐसे नेताओं के सहारे पार्टी को अच्छे दिन आने की उम्मीद की जानी चाहिये। इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है। बैठक की शुरूआत से लेकर अंत में आक्रोशित कार्यकर्ता एक ही सवाल बार-बार दागते रहे निष्क्रिय जिलाध्यक्ष को जल्द से जल्द हटाया जाये। बरना आने वाले चुनावों में भी पार्टी को हार का सामना ही करना पड़ेगा। जिस तरह से पार्टी बैठक में जो हंगामा हुआ वह वास्तव में पार्टी के सेहत के अनुकूल नहीं कहा जा सकता है। मिशनरी कार्यकर्ताओं की नाराजगी यदि समय रहते दूर न की गयी तो लोकसभा चुनाव में पार्टी की क्या स्थिति रहेगी इसका आंकलन सहज ही लगाया जा सकता हैं।






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