उरई। आबकारी ठेकों के लिए हैसियत प्रमाण पत्र और चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत ने भ्रष्टाचार के नये दरवाजे खोल दिये हैं। घूसखोरी को इसमें विकराल रूप में देखकर सरकार की जनता थू-थू कर रही है।
सरकार एक ओर स्वच्छ प्रशासन का दावा कर रही है, दूसरी ओर प्रशासनिक कसावट की क्षमता न होने से उसका हर कदम भ्रष्टाचार को नई बुलंदियों पर पहुंचाने की वजह बन रहा है।
आबकारी ठेकों में सिंडीकेटशाही को न पनपने देने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन ठेकों के माध्यम से रोजगार देने की अच्छी मंशा से सरकार ने इस बार प्रावधान किया है कि एक फर्म दो से ज्यादा दुकानों के लिए आवेदन नही कर सकेगी। नतीजा यह है कि इन ठेकों के आवेदकों की कतार लग गई है। जिसका भरपूर दोहन भ्रष्ट सरकारी तंत्र कर रहा है।
आबकारी ठेकों के लिए 28 फरवरी तक आनलाइन आवेदन होने हैं। इसलिए आवेदक बेचैन है कि कितनी जल्दी वे हैसियत प्रमाण पत्र और चरित्र प्रमाण पत्र बनवा सकें। उनकी व्याकुलता अधिकारियों के लिए उन्हें कैश कराने का अवसर बन गई है। पहले जहां बाबू कुछ रुपये का नजराना लेकर सारे प्रमाण पत्र बना देते थे वहीं अब अधिकारियों की भी निगाह इस पर हो गई है। हैसियत प्रमाण पत्र के लिए आने वाले आवेदन संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वेबजह की आपत्तियां लेकर लौटा रहे हैं तांकि आवेदक उनके सामने शरणं गच्छामि हो और वे उससे मोटा खर्चा निकाल सकें। चरित्र प्रमाण पत्र में भी पुलिस विभाग के अधिकारी इसी तरह की करतूत दिखा रहे हैं।
पहले कभी इन प्रमाण पत्रों को बनवाने में इतनी गंदगी नही मची जितनी अब है। इसलिए लोग मजबूरी में यह कहने लगे है कि मौजूदा सरकार सबसे ज्यादा भ्रष्ट है। लोक सभा चुनाव की बेला में सरकार के बारे में यह परसेप्शन सत्तारूढ़ पार्टी के लिए खतरनाक है। बशर्ते यह जानकारी सत्ता में बैठे शीर्ष लोगों तक पहुंचे जो शायद नही पहुंच पा रही।
जालौन टाइम्स से लोगों ने इसकी आवाज बुलंद करने की अपील की है। तांकि सरकार समय रहते सचेत हो सके और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े तेवर दिखाकर प्रशासन पर लगाम लगाने की क्षमता का परिचय लोगों का दिल जीतने के लिए दे सके।

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