उरई । जनपद मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम बोहदपुरा-कुकरगांव के बीच कुशवाहा के खेत से जेसीबी मशीन से मिट्टी का खनन कराया जा रहा है जो वैध या अवैध इस मामले में जिम्मेदार अमला अपना मुंह खोलने को तैयार नजर नहीं आ रहा है। यदि मिट्टी का खनन अवैध है तो अधिकारियों को इस मामले में गौर करना चाहिये और यदि खेत से मिट्टी का खनन कराने की अनुमति ली गयी है तो कितने फुट तक मिट्टी की खुदाई करायी जा सकती है इस बात को मीडिया से स्पष्ट करना चाहिये। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि खेत से मिट्टी का खनन कराने में सपा शासन में सक्रिय एक नेता अपनी हनक से अवैध तरीके से मिट्टी का खनन रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिन के उजाले में करा रहा है यही कारण है कि जालौन रोड पर मिट्टी भरे दर्जन भर से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्राली फर्राटा रेस में शामिल हैं।
वैसे तो प्रशासन अमला हर गलत काम को बंद कराने की क्षमतायें रखता है। लेकिन जब मामला सीधे-सीधे अर्थ से जुड़ा होता है तो जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों को भी खूंटी पर टांगने में संकोच नहीं करते हैं। ऐसा ही मामला ग्राम बोहदपुरा-कुकरगांव के बीच में किसान बाबा कुशवाहा के खेत से एक मिट्टी माफिया तो सपा शासन में हर रोज कलेक्ट्रेट में लग्जरी गाड़ी में सवार होकर आता था और ज्यादातर समय वह कलेक्ट्रेट में इधर उधर बैठकर समय व्यतीत करता था वह भाजपा शासन में फिर से मिट्टी का अवैध खनन कराने के लिये सक्रिय हो गया हैं। उसने राजस्व विभाग के साथ-साथ खनिज कार्यालय में अर्थ का प्रयोग कर कुछ जिम्मेदार अधिकारियों से अवैध तरीके से मिट्टी का खनन कराने का तानाबाना बुना और किसान के खेत में मिट्टी की खुदाई कराने के लिये अपनी जेसीबी मशीन पहुंचा जहां जेसीबी मशीन रात में नहीं बल्कि दिन के उजाले में मिट्टी की खुदाई कर ट्रैक्टर-ट्राली में भर देती है फिर ट्रैक्टर चालक मिट्टी लेकर जिला मुख्यालय में पहुंचकर पहले से ही निर्धारित स्थानों पर पुराई करने में जुटे हुये हैं। ग्रामीणों की मानें तो जेसीबी मशीन द्वारा खेत से मिट्टी का खनन पूरी तरह से अवैध है। जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। ग्रामीणों ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि जो व्यक्ति मिट्टी का खनन करा रहा है वह भी यदा कदा अपनी लग्जरी गाड़ी में सवार होकर जालौन रोड पर भ्रमण करता रहता हैं ताकि उसके अवैध कार्य में यदि कोई रोड़ा डालने का प्रयास करता है तो वह मामले को मौके पर ही सुलटा देता है। ताज्जुब की बात तो यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्यों मौन साधे हुये हैं यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही है। कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर मिट्टी का अवैध खनन कराया जा रहा हो। हालांकि कहने के लिये जालौन चैराहा पर चैबीस घंटे पुलिस पिकैट तैनात रहती है उन्होंने भी अपने आला अधिकारियों को मिट्टी के अवैध खनन के मामले में अवगत कराया जाना जरूरी क्यों नहीं समझा यह तो पुलिस पिकैट के जवान ही बता सकेंगे।





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