उरई (जालौन)। आईजीआरएस को सरकार ने इस मंशा से शुरू किया था कि ताकि जन शिकायतों का निस्तारण तत्परता से हो लेकिन जनपद के बेसिक शिक्षा महकमे में खंड शिक्षा अधिकारी कुठौंद की शिकायत साक्ष्यांे सहित शिकायतकर्ता रामराजा द्विवेदी द्वारा की गयी जिसमें शिकायत संख्या 50016517006856 ऑन लाइन एवं शिकायत संख्या 12165170435961 के माध्यम से की थी जो आज तक लंबित है। इसके संबंध में मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक झांसी मंडल झांसी द्वारा 5 व 9 फरवरी को निस्तारण के निर्देश भी दिये गये थे। उसे भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया और आज तक शिकायत का निस्तारण नहीं किया गया और खंड शिक्षा अधिकार कुठाैंद पूरी तरह से स्वेच्छाचारी रवैया अख्तयार किये हुये हैं।
उक्त मामले में कार्यालय सूत्रों से पता चला कि मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक ने उक्त शिकायतों को निस्तारण के निर्देश दिये थे लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा उक्त शिकायतों का निस्तारण नहीं किया गया जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी कुठौंद का मनोबल बढ़ा हुआ है। उन्होंने आधारहीन सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय रोमई का वेतन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा रोके जाने के बावजूद शिक्षक का वेतन आहरित करने का दुस्साहस दिखाया जिसमें वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण भी मांगा गया। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी कुठौंद पर कोई फर्क नजर नहीं आया इसीक्रम में उमेश मिश्रा सहायक अध्यापक विजुआपुर दिवारी का 21 फरवरी 2017 से 20 मार्च 17 तक का चिकित्सीय अवकाश स्वीकृत किया गया था जबकि उमेशचंद्र मिश्रा द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण में उन्होंने अपने को उक्त अवधि में उपस्थित दिखाया और उस उपस्थिति को खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा सत्यापित भी किया गया।
जबकि उक्त प्रकरण की तह में जाने पर पता चला कि खंड शिक्षा अधिकारी कुठौंद द्वारा पहले उपस्थिति को शिक्षक के उपस्थिति होते हुये अनुपस्थित दर्शा दिया ताकि उक्त शिक्षक के वेतन आहरित न हो सके। जब शिक्षक द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण में उपस्थिति को सत्यापित किया। इस मामले की शिकायत होने पर अब उसी तिथि से चिकित्सीय अवकाश स्वीकृति किया गया है। यह तो महज एक मनमानी का उदाहरण है। कार्यालय द्वारा मनमानी का आलम तो यह है कि कार्यालय में एक गाड़ी किराये पर लगा ली जिसका टैक्सी परमिट ही नहीं हैं। जबकि कार्यालय के पास जो गाड़ी है वह बोर्ड परीक्षाओं में लगी हुयी है। बताया जाता है कि जो गाड़ी बीएसए कार्यालय में अटैच की गयी है वह कार्यालय में पदस्थ्य किसी कर्मचारी अनिल गुप्ता की बतायी जा रही हैं। इस तरह का कारनामा पूर्व के समय में भी खेला गया जबकि बीएसए कार्यालय में संबद्ध शिक्षक प्रमोद शुक्ला की गाड़ी भी लंबे समय तक बीएसए कार्यालय में किराये पर लगायी गयी थी उसका भी टैक्सी परमिट नहीं था। यहां यह जानना आवश्यक है कि जब तक संबंधित विभाग की गाड़ी कंडम घोषित न हो जाये तब तक उक्त कार्यालय में इस तरह से गाड़ी किराये पर नहीं लगायी जा सकती हैं और यदि आवश्यक होता है तो टैक्सी परमिट की अर्हता पूरी करने वाली गाड़ी ही किराये पर लगायी जा सकती है। यह बीएसए कार्यालय का गंभीर मामला है इसकी तत्काल जिलाधिकारी निष्पक्ष जांच करायें तो सब कुछ खुलकर सामने आ जायेगा।






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