जालौन (उरई)। बाल श्रम अभी भी समाज के लिए एक अभिशाप बनकर खड़ा है। इस समस्या को जड़ से मिटा देने के लिए शासन प्रशासन ने कई योजनाएं चलाई परन्तु विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते कम उम्र के बच्चों को मजदूरों की तरह काम करना पड़ रहा है ।
बाल श्रम विभाग तथा प्रशासन की रिपोर्ट अनुसार क्षेत्र में कही भी बाल श्रमिक नही हैं । परंतु वास्तविकता में आलम कुछ और ही है कि नगर में संचालित होटलों चाय के स्टाल तथा खेतों में टूट रही हरी मटर की फली तोड़ने के साथ शादी विवाह में बजने वाले बैंड बाजों के साथ चलने वाली लाइट तथा रोशनी की गाड़ियों को छोटे छोटे बच्चों द्वारा चलवाया जा रहा है। देर रात तक चलने वाले वैवाहिक कार्यक्रमों में बच्चों से देर रात तक काम कराया गया है। उत्सव गृहों में काम कर रहे हलवाई बच्चों से बेटर का काम तथा जूठे वर्तन साफ करा रहे हैं। उत्सव कार्यक्रमों होटलों में दुकानों में तथा लाइटों में खुलेआम श्रम नियमों का उल्लंघन हो रहा है। इसके बाद भी सम्बंधित विभाग कार्रवाई नहीं करता है। श्रम नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए श्रम परिवर्तन अधिकारी आर के चतुर्वेदी की नियुक्ति की गई किन्तु इनके पास जालौन के साथ एक अन्य तहसील का काम होने के कारण वह कम ही जालौन में समय देते हैं। नगर में जिन 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के हाथ में किताबें होनी चाहिए वह नगर के विभिन्न मुहल्लों से निकलने वाले कचरा में अपना भविष्य तलाशते नजर आते या फिर बाल मजदूरी करते नजर आते हैं। जब इस सन्दर्भ उपजिलाधिकारी भैरपाल सिंह बात की गयी तो उन्होंने बताया कि उन्होंने श्रम प्रर्वतन अधिकारी को बुला है तथा शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।







Leave a comment