उरई। एडीआर, यूपी इलेक्शन वाच एवं निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में हमारा जनप्रतिनिधि कैसा हो, विषयक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन दयानंद वैदिक कालेज के पुस्तकालय सभागार मेें किया गया। जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (एनएसएस) के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। वक्ताओं ने नेताओं के स्थानीय होने के साथ साथ जनता के साथ खड़े होने वाले जनप्रतिनिधि को प्राथमिकता देने की बात कही।
यूपी इलेक्शन वाच के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा ने कहा कि जनप्रतिनिधि सिर्फ हंगामा करने वाले नहीं होने चाहिए। वे जनता के साथ खड़े होने वाले होने चाहिए। जनप्रतिनिधि जनता से पूछकर निर्णय करने वाले होने चाहिए। न कि मनमानी करने वाले हो। आज यूपी के विधायकों का वेतन सांसद से ज्यादा है। जबकि एक संसदीय क्षेत्र में तीन से पांच विधायक होते है। जनता को मांगपत्र बनाकर जनप्रतिनिधि से काम लेना सीखना चाहिए। उन्होंने उनकी निधियों, पेंशन और अधिकार के बारे में जानकारी दी। साथ ही कहा कि चुनाव जीतने के बाद ये तथाकथित जनसेवक जनता पर ही रौब दिखाने लगते है।
प्राध्यापक डा. रमेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधि बिना भेदभाव के काम करना वाला होना चाहिए। यह नहीं कि अमुक क्षेत्र से उसे वोट नहीं मिला है तो वह वहां काम नहीं कराएगा। उसे समभाव से काम करने वाला कर्मठ व ईमानदार होना चाहिए।
इस मौके पर डा. माधुरी रावत, डा. नीति कुशवाहा, नागम खानम, डा. साम्या बघेल, धीरेंद्र सिंह, शशि शेखर दुबे आदि ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन नोडल अधिकारी राजेश कुमार पालीवाल ने किया।
इस दौरान आयोजित भाषण प्रतियोगिता में सुरभि मिश्रा, प्रवीण कुमार त्रिवेदी, धीरेंद्र सिंह, शिवानी गुर्जर, धीरज कुमार गौतम, हिमांशी श्रीवास्तव, शिवांशी यादव, हरिओम आदि ने भाग लिया। जिसमें निर्णायक मंडल में शामिल डा. हर्ष कुमार गर्ग, डा. गिरीश कुमार श्रीवास्तव, डा. रमेंद्र कुमार गुप्ता ने भाषणों का मूल्यांकन करने के बाद प्रवीण कुमार को पहला, हरिओम ने दूसरा तथा धीरज कुमार गौतम ने तीसरा स्थान दिया। जबकि सांत्वना पुरस्कार शिवांशी यादव को दिया गया।
नेताओं के लिए भी हो पात्रता परीक्षा
भाषण प्रतियोगिता के दौरान छात्र प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने कहा कि जिस तरह छात्रों के लिए किसी प्रतियोगिता में पात्रता परीक्षा पास करना आवश्यक होता है। उसी तर्ज पर नेताओं के लिए भी लीडर पात्रता परीक्षा (एलईटी) होना चाहिए। ताकि पढ़े लिखे और जनता की उम्मीदों पर खरे होने वाले नेता ही आगे आ सके। धीरज गौतम ने कहा कि चुनाव खर्च में बेतहाशा पैसा बहाने वाला नहीं होना चाहिए। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने जनप्रतिनिधियों से काम लेने के लिए मांगपत्र बनाने का संकल्प लिया।

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