उरई। एडीआर, यूपी इलेक्शन वाच तथा निर्वाचन आयोग के संयुक्त तत्वावधान में हमारा जनप्रतिनिधि कैसा हो विषयक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन श्रीमती रसकेंद्री देवी महाविद्यालय ऊमरी में किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि अकेले नेता को दोष देना ठीक नहीं। हमें भी अपने लालच को दूरकर नैतिकता के आधार पर वोट करना होगा।
यूपी इलेक्शन वाच के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा ने कहा कि सबसे पहले हमें अपने जनसेवक के बारे में जानकारी रखनी चाहिए और उनसे काम लेने के लिए अपने क्षेत्रवार मांगपत्र बनाकर उन पर जनदबाव बनाना चाहिए। चुनाव आयोग के निर्देश पर पूरे साल चुनाव सुधार के काम चलेंगे। उन्होंने कहा कि नेता आखिरी सत्र में हाथ उठाकर मनमाने वेतन भत्ते बढ़ा लेते है। जबकि जनहितैषी फैसले लेने में आनाकानी करते है। उन्होंने कहा कि चुनाव खर्च की सीमा के निगरानी के लिए पर्यवेक्षक की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि प्राचार्य डा. राकेश द्विवेदी ने कहा कि हमें समाज की अवधारणा को समझना होगा। बेईमानों में भी ईमानदार को खोजकर चुनना होगा। हमें निहित स्वार्थ से ऊपर उठकर वोट डालकर अच्छे व सच्चे जनप्रतिनिधि को चुनना है। अध्यापक अभय भदौरिया ने कहा कि हम पहले स्वार्थ को लेकर वोट डालते है और फिर जनप्रतिनिधि से ईमानदारी की अपेक्षा करते है। पहले खुद में सुधार जरूरी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कालेज के प्रबंधक विजय कुमार सिंह भदौरिया बब्बू ने कहा कि हमें ऐसे जनप्रतिनिधि को चुनना चाहिए, जो व्यक्तिगत लाभ की बजाय जनता के लाभ की सोचे। जातिगत व दलगत भावना से ऊपर उठकर जनसमस्याओं का चयन करना है।
इस मौके पर शशि शेखर दुबे, रानी यादव, जया देवी, वंदना प्रजापति, वीरसिंह, चंद्रशेखर, सुप्रिया सेंगर, अरविंद कुमार, दिलीप सिंह सेंगर, संतोष चतुर्वेदी ने विचार रखे। अंत में अभय भदौरिया ने सभी का आभार जताया।
भाषण प्रतियोगिता में नित्या ने बाजी मारी
हमारा जनप्रतिनिधि कैसा हो विषयक भाषण प्रतियोगिता में करीब एक दर्जन बच्चों ने प्रतिभाग किया। जिसमें नित्या गौतम को पहला, अनिरुद्ध को दूसरा तथा अनुपम सक्सेना को तीसरा स्थान मिला। निर्णायक की भूमिका डा. राकेश द्विवेदी, अभय भदौरिया व शिवाराणा सिंह ने निभाई।
तो नेताओं की भी बंद हो पेंशन
वक्ताओं ने कहा कि जरूरतमंद विधवा पेंशन के लिए परेशान होती है। उसमें पात्र -अपात्र कैटेगरी बनाकर परेशान किया जाता है। लेकिन जनप्रतिनिधि लगातार अपने वेतन भत्ते बढ़ा लेतेे है। जबकि सरकारी कर्मचारियों के लिए भी वर्ष 2005 से पेंशन बंद कर दी गई है। फिर किस आधार पर जनप्रतिनिधि पेंशन ले रहे है।

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