0 शिक्षकों का संबद्धीकरण करना कहां तक सही

उरई। जिले का बेसिक शिक्षा महकमा अपनी स्वेच्छा सेे नियम बना लेता और उसी पर अनुपालन शुरू हो जाता है। उसे न तो शासन की मंशा से कोई लेना देना रहती है और ही शासन द्वारा प्रतिपादित नियमों को लगू करने में कोई दिलचस्ती रहती है। वह तो अपनी इच्छा से ही नियमावली को तोड़ने मरोड़ने से भी नहीं चूकता है।

बताते चलें कि शासन द्वारा बगैर ई-टेण्डर अथवा ई-कुटेशन के प्राइवेट कार्य नहीं कराया जायेगा। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने इसको रद्दी की टोकरी में फेंकते हुये पहले प्रमोद शुक्ला जो कि शिक्षक हैं और कार्यालय में सर्व शिक्षा अभियान का कार्य देखने के लिये पिछले कई वर्षों से संबद्ध है। बताया जाता है कि उक्त शिक्षक कभी भी शिक्षण कार्य नहीं किया जबकि शिक्षा की सेवा शर्तों में उसकी नियुक्ति शिक्षा कार्य के लिये होती है। वहीं कार्यालय में पदस्थ लिपिक अनिल गुप्ता हैं उनकी गाड़ी को ही कार्यालय में संबद्ध कर लया गया। जबकि इस मामले में शासन की नीति है कि यदि प्राइवेट वाहन लगाना है तो उसका टैक्सी परमिट होना चाहिये तभी वह किसी सरकारी कार्यालय में किराये पर लगायी जा सकती है। कार्यालय सूत्रों की मानें तो कार्यालय में रात अंधेरी हो तो और कुछ चंद्रमा की रोशनी में और कुछ अभी विगत माह खंड शिक्षा अधिकारी जालौन द्वारा शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही हेतु रिपोर्ट भेजी थी जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्यवाही करते हुये बृजेश श्रीवास्तव को निलंबित तथा कौशल किशोर जूनियर हाईस्कूल धनौरा कलां, रामराजा निरंजन, दयाशंकर खनुआ, बृजराज सिंह, आलोक गुप्ता कैथ का एक दिन का वेतन काटा गया। लेकिन जैसे ही चंद्रमा की रोशनी आयी तत्काल बृजेश श्रीवास्तव को बगैर किसी जांच के महज बारह घंटे में बहाली आदेश थमा दिया गया जबकि अन्य शिक्षकों की सजा अभी भी बरकरार है। देखने वाली बात तो यह है कि जनता जानना चाहती है कि यदि खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट सही है तो उसे बहाल कैसे किया, यदि आख्या गलत थी तो उसे निलंबित क्यों किया। माना कि यदि रिपोर्ट गलत थी तो संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को दंडित क्यांें नहीं किया गया और अन्य शिक्षकों की सजा खत्म क्यों नहीं की गयी। मामला यही नहीं रुकता छिरिया सलेमपुर की प्रधानाध्यापिका जो कि शैक्षिक गुणवत्ता के लिये विशेष रूप से जानी जाती है उसी को सर्व शिक्षा अभियान में संबद्ध कर लिया। अब प्रश्न यह उठता है कि छिरिया सलेमपुर उरई से 35 किलोमीटर दूरी पर है। वह कैसे विद्यालय का संचालन क रेंगी। चूंकि प्रधानाध्यापिका के पास समस्त वित्तीय प्रभार होते जबकि समन्वयक पद पर नियुक्ति निदेशक सर्व शिक्षा के पास सन्निहित है उसके बदले प्रमोद शुक्ला व प्रधानाध्यापिका को संबद्ध कर दिया गया। जबकि निदेशक बेसिक शिक्षा के स्पष्ट निर्देश है कि शिक्षकों को कहीं पर भी संबद्ध न किया जाये। इसके लिये प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भगवत पटेल द्वारा समस्त संबद्धीकरण समाप्त कर दिया था। उसको भी नकारते हुये उक्त आदेश रद्दी की टोकरी की शोभा बढ़ा रहा है।

Leave a comment

Recent posts