उरई- । नौजवान भारत सभा ने अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद यादगारी अभियान में जिलापरिषद, सुशील नगर, लहरिया पुरा, अम्बेडकर चैराहा, शहीद भगतसिंह चैराहा, राठ रोड, बजरिया, माहिल तालाब , कोंच स्टैंड, रामकुण्ड आदि जगहो ंसे निकालते हुए नुक्कड़ सभाएं कीं, क्रांतिकारी गीत गाये और परचे बांटे। बृजेश ने कहा कि आज हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जब स्वर्ग बनाने के नाम पर देश की जनता को नर्ककुण्ड में ढकेला जा रहा है। जब सबको साथ लेकर चलने के नाम पर लोगों को आपस में धर्म के नाम पर मरने कटने के लिए बांटा जा रहा है। जब नाम लोकतंत्र का लिया जा रहा लेकिन फासीवादी निरंकुशतंत्र का इंतजाम पुख्ता किया जा रहा है। मेहनकशों का हितैशी होने का ढोंग रचने वाले मेहनतकशों के खिलाफ सबसे भयंकर साजिसें रच रहे है। हर क्षण अखवारों व चैनलों में दिखाये जा रहे स्किल इण्डिया, युवा शक्ति, विकास की मृगमारीचिका में देश का 30 करोड़ वेरोजगार युवा सड़क पर चप्पलें फटकारता घूम रहा है। महंगाई, भुखमरी-कुपोषण, वेघरी, वेरोजगारी जैसी समस्याओं को लोगों के दिमागों में आम नियम या प्राकृतिक नियम की तरह बैठाकर लोगों को बस जाति-धर्म, राष्ट्र के नाम पर मरने के लिए ललकारा जा रहा है। एच.एस.आर.ए. के कमाण्डर इन चीप चन्द्रशेखर आजाद को याद करना इस अंधेरे दौर में लोगों के बीच उम्मीद की किरण पहंुचाना है।
यशवन्त ने बताया कि आजाद का समाजवाद की ओर आकर्षित होने का और भी कारण था आजाद का जन्म निर्धन परिवार में हुआ था और अभाव की चुभन को व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने अनुभव किया था। बचपन में भावरा तथा उसके इर्द-गिर्द के आदिवासियों और किसानों के जीवन को भी वे काफी नजदीक से देख चुके थे। बनारस जाने से पहले बम्बई में मजदूरों के बीच रहने का अवसर मिला। किसानों तथा मजदूरों के राज्य की जब वे चर्चा करते थे तो उसमे ंउनकी अनुभूति की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी। आजादी के बाद भूरे साहबों ने संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद शब्द केवल जनता को धोखा देने के लिए जोड़ा था। चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व में एच.एस.आर.ए. के समाजवाद का इस पाखण्ड से कुछ लेना देना नही था। पिछले सात दशको में भूरे साहबों ने इन क्रांतिकारियों की विरासत को अपने बूटों तले रौंदते हुए देश की आम जनता की जिन्दगी को तबाही और बर्वादी के दलदल में धकेल दिया।
लक्ष्मी ने कहा कि “विकास“ के शोर के पीछे की सच्चाई यह है कि देश के ऊपर की 1 फीसदी आबादी के पास देश की कुल सम्पदा का 58.4 प्रतिशत हिस्सा इकट्ठा हो चुका है। दूसरी ओर नीचे की 50 फीसदी आबादी के पास कुल सम्पदा का महज 1 फीसदी हिस्सा है। वल्र्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट 2018 के मुताबिक देश की ऊपर की .001 प्रतिशत लोगों की आय में 3083 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मई 2017 टाइम्स आफ इण्डिया की रिपोर्ट के हिसाब से देश में हर घण्टे एक छात्र आत्महत्या करता है। भाजपा सरकार सत्ता में आने पर 2 करोड़ रोजगार हर साल पैदा करने का वादा किया था लेकिन अब तो वो युवाओं को पकौड़ा बेंचने की सलाह दे रहीं है। एच. एस. आर. ए के क्रांतिकारियों का यह मानना था कि अगर गोरे साहबों के चले जाने के बाद भूरे साहब जनता पर डण्डे बरसाने का काम करते हैं तो इस जनता की जिंदगी में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसलिए उन्होंने जाति-धर्म के भेदभावों को भूलकर आम जनता को हर तरह की लूट के खिलाफ एकजुट होने का आहवान किया। अब सरकार को भी अंदाजा है कि बहुत दिनों तक जनता “अच्छे दिनों” के भ्रमजाल में फसी नहीं रहेगी। इसलिए अब एक तरफ धर्म के नाम पर बांटने की तैयारी चल रही है तो दूसरी तरफ लोगों के मुंह में ताला जड़ने के लिए “युपीकोका” जैसे निरंकुश कानूनों की तैयारी की जा रही है। चन्द्रशेखर आजाद धर्म निरपेक्षता के प्रबल हिमायती थे। उनका यह मानना था कि धर्म को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। आज देश के युवाओं को चन्द्रशेखर आजाद की इस विरासत को अपनाना ही होगा। इन क्रान्तिकारियों को सच्ची श्रद्धांजली उनके अधूरे सपनों को पूरा करना है। इनको और टालना हमारी बुजदिली और कायरता ही होगी। हम सभी इंसाफपसंद नौजवानों और नागरिकों का आहवान करते हैं कि न्याय व समता की इस लम्बी लड़ाई में हमारे हमसफर बनें।
कार्यक्रम में सम्मिलित साथी – लक्ष्मी , यशवंत , आभा , अंजलि , अरुंधति, सत्यम , दिनेश , तेजसिंह , धीरेन्द , अमित , अतुल कृष्ण कुमार आदि प्रमुख थे ।





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