* फर्जी आधारों के आधार पर कराये जा रहे हैं फर्जी बैनामे

* कमोवेश आधा दर्जन मामले जांच के राडार पर, ज्यादातर मामले ग्राम बसोव के

कोंच-उरई । आजकल रजिस्ट्री दफ्तर में फर्जी कागजों के आधार पर फर्जी बैनामे कराने का खेल जोरों पर है और फर्जी नामों से फर्जी आधारों के आधार पर लिखापढी करा कर लोगों की जमीनें हड़पने का खेल चल रहा है। गुजरे कल ऐसे दो मामले पकड़ में आये थे जिनमें एक बैनामा तो पलट कर जान छुड़ा ली गई जबकि दूसरे की तहरीर कोतवाली पहुंची है जिसमें पुलिस जांच शुरू हो गई है। आज मंगलवार को रजिस्ट्री दफ्तर के बाहर ग्राम बसोव के आधा सैकड़ा लोगों का जमावड़ा लगा था, बताया गया है कि उनके गांव के लगभग आधा दर्जन ऐसे मामले संज्ञान में आये हैं जिनमें नकली आधार बना कर रजिस्ट्रियां करवाई गईं हैं जिनके कागज रजिस्ट्री ऑफिस से निकलवाये जा रहे हैं। इस फर्जीबाड़े में ज्यादातर मामले ग्राम बसोव से जुडे बताये गये हैं।

गुजरे कल सोमवार को कोंच कोतवाली में एक मामला आया था जिसमें कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बसोव निवासी दलित विरादरी के भगवानदास पुत्र गोधन ने बताया था कि मौजा बसोव में गाटा संख्या 504 रकवा 1.392 हेक्टेयर में वह आधी जमीन का मालिक है और गोकुलप्रसाद के साथ सह खातेदार है। उसकी जमीन का बैनामा फर्जी तरीके से कागजात तैयार कराके कर दिया गया है। ज्ञात हुआ कि उसके ही गांव के बालमुकुंद पुत्र तुलसीराम ने अपनी फोटो लगा कर राजकुमारी पत्नी मोहनलाल वर्मा निवासी कोंच को 4 लाख 95 हजार रुपये में 15 दिसंबर 2017 को बैनामा कर दिया था। इसके अलावा एक और मामला भी आया था जिसमें क्रेता द्वारा जमीन लौटा दिये जाने के बाद कार्यवाही से हाथ खींच लिये गये थे। मंगलवार को ग्राम बसोव के पवन परिहार, चतुरसिंह, वीरेन्द्र अहिरवार, सरजू, मुन्ना, मुकेशकुमार, राजू, वीरू आदि आधा सैकड़ा से भी अधिक लोग तहसील आये और एसडीएम से शिकायत की कि उनके गांव के कमोवेश आधा दर्जन मामलों में फर्जी तरीके अपना कर किसी की जमीन के बैनामे किसी और ने कर दिये हैं। एसडीएम ने जांच कराने की बात कही है। इन्हीें फरियादियों में एक फूलादेवी के हाथ में दो आधार कार्ड एक ही नाम और नंबर के थे लेकिन उन पर फोटो अलग अलग लोगों के हैं। दोनों आधारों का नंबर 495182713331 है लेकिन एक में फूलादेवी की जन्मतिथि 01.01.1961 तथा दूसरे में 01.01.1975 अंकित है। फूलादेवी ने कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि उसके ही गांव के बालमुकुंद पुत्र तुलसीराम की पत्नी का फोटो लगा है और इस तरह के हथकंडे अपना कर गरीब किसानों की जमीनों के बैनामे कराये जाने का खेल चल रहा है। गौरतलब यह भी है कि सोमवार को भगवानदास ने जिस बालमुकुंद के खिलाफ फर्जी बैनामे का आरोप लगाया है वही बालमुकुंद फूलादेवी का भी संदिग्ध है।

गांव में हड़कंप की स्थिति है-ग्राम प्रधान

फर्जी तरीके से किसी की जमीन का बैनामा किसी और द्वारा कर दिये जाने की परतें खुलने के बाद गांव बसोव में हड़कंप की स्थिति है और लोगों ने तहसील तथा रजिस्ट्री दफ्तर की ओर दौड़ लगा दी है। लोग यह पता करने में जुटे हैं कि कहीं उनकी जमीन की भी तो नहीं रजिस्ट्री कर दी गई है। यह कहना है ग्राम प्रधान बसोव राजेश राजपूत का। उन्होंने बताया है कि लोग डरे हुये हैं क्योंकि अब तक आधा दर्जन मामले संदेह के घेरे में आये हैं जिनके कागजात रजिस्ट्री दफ्तर से निकलवाये जा रहे हैं। यदि मामले सही पाये जाते हैं तो उनकी भी एफआईआर कराई जायेगी।

लेखपत्र की विधि मान्यता से सरोकार नहीं-सब रजिस्ट्रार

बैनामा फर्जी है या सही, यह देखना क्रेता और विक्रेता की जिम्मेदारी है। यहां रजिस्ट्री दफ्तर में हुये फर्जीबाड़े के इस खेल से सब रजिस्ट्रार ज्ञानेन्द्रकुमार शुक्ला ने अपने को अलग खींचते हुये दो टूक कहा है कि रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के लेखपत्र की विधि मान्यता से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। ऑन लाइन रजिस्ट्री के लिये जिन प्रपत्रों की आवश्यकता होती है वे अगर प्रस्तुत किये गये हैं तो उन्हें रजिस्ट्री करने में कोई दिक्कत नहीं है। ऑन लाइन करने के लिये कोई यदि आधार कार्ड, पहचान पत्र आदि शामिल करता है तो वह बैनामा रोकने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।

झटका लगा है ‘मेरा आधार, मेरी पहचान को

एक तरफ सरकारी सुविधाओं में आधार की अनिवार्यता बढती जा रही है और आधार को गोपनीयता से जोड़ कर देखा जाता है जिसके चलते  ‘मेरा आधार, मेरी पहचान की अवधारणा को बल मिला है लेकिन जिस तरह से फर्जी आधार बनने के मामले सामने आ रहे हैं उसमें उक्त अवधारणा कहीं तिरोहित होकर रह गई है और बड़े सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कौन और कैसे बनाता है यह फर्जी आधार। क्या इस गोरखधंधे में कोई बड़ा रैकिट काम कर रहा है, इसकी न केवल जांच होनी जरूरी है बल्कि ऐसे लोगों को सीखचों के पीछे भेजे जाने की भी जरूरत है। यहां गौरतलब यह भी है कि बैनामों में गवाही देने बाले भी पांच सौ-हजार रुपये में आसानी से मिल जाते हैं।

 

 

 

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