उरई। बिजली विभाग पर किसी का कोई जोर नही है। जर्जर विद्युत लाइनों के कारण आये दिन हादसे हो रहे हैं। लोगों और मवेशियों की जान जा रही है। फिर भी बिजली विभाग को परवाह नही है। यहां तक की माननीयों के लिखने के बाद भी जर्जर लाइनें ठीक नही कराई जा रही हैं।
इसका उदाहरण तब सामने आया जब माधौगढ़ के विधायक मूलचंद निरंजन ने बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता से अपने क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जर्जर विद्युत लाइनों के कारण लोगों की जान जोखिम मे है। इस पर अधिशाषी अभियंता ने ऐसे गांवों की सूची देने का अनुरोध किया तांकि वे तत्काल लाइनें बदलवा सकें। लेकिन हैरत की बात यह है कि विधायक द्वारा भेजी गई सूची को दो महीने का समय बीत चुका है पर अभी तक कोई काम शुरू नही किया गया।
यही नही इन दिनों बिजली की आपूर्ति भी नाम मात्र की रह गई है। टीहर क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के सैक्टर संयोजक रमाकांत सोनी का कहना है कि जिन गांवों में लाइनें जर्जर हैं उनमें टीहर भी शामिल है। इसके अलावा उनके गांव सहित इलाकें में रोजाना बिजली सप्लाई 8 घंटे से भी कम हो रही है। जनपद में मुख्यमंत्री के दौरे की घोषणा के बाद से तो बिजली विभाग ने इंतहा ही पार कर दी है। क्या विभाग द्वारा जानबूझकर लोगों में सरकार के प्रति असंतोष को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
स्टोर का सामान हो जाता है गायब
ध्यान रहे कि बिजली विभाग में ढांचागत अव्यवस्था की मुख्य वजह हर दर्जे का भ्रष्टाचार है। स्टोर में ट्रांसफार्मर, तार सभी गायब हो जाते हैं क्योंकि उन्हें चोर बाजार में बेंच दिया जाता है और इसके बाद रहस्यमय ढंग से स्टोर में आग लग जाती है जिससे सारे सबूत दफा हो जाते हैं। रिपेयरिंग की मद में भी घपला होता है। कागजी रिपेयरिंग दिखाकर बजट हड़प जाना आम परंपरा का रूप ले चुका है। इस चोरी की बंदर बांट का हिस्सा ऊपर तक पहुंचता है इसलिए जानते हुए भी शीर्ष स्तर तक से इसे रोकने की कोशिश नही होती। योगी सरकार के गठन के बाद उम्मीद बंधी थी कि इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा लेकिन यह उम्मीद फलीभूत नही हो सकी। लगता है कि मुख्यमंत्री को इसकी भनक नही है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार की इस इंतहा को संज्ञान में लें। बिजली लोगों से सीधा जुड़ा मुददा है जिससे इसकी संवेदनशीलता सबसे ज्यादा है। सरकार की छवि सुधारने के लिए इस विभाग को सुधारा जाना लाजिमी हो गया है।






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