उरई। महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। जबकि योगी सरकार की जुबान यह कहते नही थकती कि महिलाओं के सम्मान के साथ इस सरकार में कोई समझौता नही होगा। उन्नाव कांड के बाद सरकार की हकीकत सामने आने के चलते ऐसे कई गड़े मुर्दे फिर उखड़ने की नौबत आ गई है।
ऐसा ही एक मामला रामपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है जहां डाक्टर के घर खाना बनाने वाली महिला की लड़की के साथ संबंध बनाकर उसकी वीडियो क्लिप बना ली जाने का मामला कई माह पहले सामने आया था पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नही की। चूंकि आरोपी अस्पताल का ही फार्मासिस्ट था इसलिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने पीड़ित महिला को काम से हटा दिया।
इस बीच पीड़ित महिला अपने पुत्री का विवाह कर चुकी है। उसके मुताबिक फिर भी फार्मासिस्ट अपनी हरकत से बाज नही आ रहा। वह उसकी लड़की की वीडियो क्लिप के आधार पर उसे फिर से अपने पास बुलाने के लिए ब्लैकमेलिंग पर उतारू है। तंग आकर उसकी मां ने अब एक बार फिर थानाध्यक्ष रामपुरा को प्रार्थनापत्र दिया है।
शील हरण के मामले की चर्चा करने वाली महिला को ही कुलटा समझने की जिस मानसिकता का पोषण वर्तमान निजाम में हो रहा है उसी के चलते उन्नाव कांड की हडडी उसके गले में फंस गई है। इसमें वफादारी निभाने वाले पुलिस वालों को भी प्रसाद मिला है और शायद यह प्रसाद निलंबन तक ही सीमित न होकर उनके जेल पहुंचने की हद तक गुल न खिला दे। इससे पुलिस ने कितना सबक लिया है इसका पता रामपुरा थानाध्यक्ष को पीड़ित महिला द्वारा दी गई ताजा दरख्वास्त पर एक्शन से पता चलेगा। वे इस प्रार्थनापत्र की जांच करते हुए आरोपी को टाइट करते हैं या अपने पूर्ववर्ती की तरह इस प्रार्थनापत्र को रददी की टोकरी में फेंक देते हैं यह बात देखने वाली होगी।

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