उरई। विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन के सोमवार को कोंच में उप जिलाधिकारी कार्यालय पर सैंकड़ों समर्थकों के साथ एक दिन के सांकेतिक धरने को लेकर प्रशासन में खलबली मची हुई है। उनके धरने को टलवाने के लिए अधिकारियों ने कई लोगों से उनसे संपर्क कराया लेकिन रमा निरंजन अपने कदम वापस खीचने को तैयार नही हुईं हैं। उन्होंने अब चंदुर्रा कांड व अन्य मांगों के अलावा शुक्रवार को मुख्यमंत्री के दौरे के समय उनके कार्यक्रमों की पत्रकारों से पर्दादारी और उन्हें ज्ञापन देने पहुंचे फरियादियों को दुत्कारे जाने के मुददों को भी शामिल कर लिया है।
रमा निरंजन ने कहा कि चंदुर्रा कांड प्रशासन की हर दर्जें की मनमानी और लापरवाही का नमूना है। अगर वे आवाज न उठातीं तो इसे दूसरा मोड़ देकर पूरे अपराध को रफादफा करने की ही साजिश हो रही थी। उन्होंने कहा कि शासन प्रशासन संवेदना शून्य होने के साथ-साथ संज्ञा शून्य भी हो गया है। उसे तंद्रा से उबारने के लिए बड़े आंदोलनों के झटके देने की जरूरत है।
रमा निरंजन ने कहा कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री जिला मुख्यालायों पर 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था करने का दावा कर रहे थे। जबकि उन्हें यह तक पता नही था कि उनके आगमन के ही दिन जिला मुख्यालय पर आधा दिन भी बिजली नही आई। जिस दिन से उनका कार्यक्रम तय हुआ था उसी दिन से बिजली विभाग ने जैसे बगावत को दिखाने के लिए आपूर्ति गड़बड़ाना शुरू कर दी थी। पिछले एक पखवारे से किसी भी दिन 12 घंटे भी आपूर्ति जिले में नही हुई। यह उनकी क्षमता पर प्रश्न चिन्ह ही है कि प्रशासन हर बिंदु पर उन्हें अंधेरे में रखने में सफल रहा।
रमा निरंजन ने कहा कि अगर सरकार चैकस होती तो पिछले एक हफ्ते से मौसम गड़बड़ाने के कारण खेतों में घर ले जाने की तैयारी के समय हुई फसलों की बर्बादी को लेकर वे किसानों को सांत्वना देने की सामायिक घोषणा अवश्य करते। इस बर्बादी की वजह से कुछ दिनों में दो-तीन किसानों की सदमें से हृदय विदारक मौत भी हुई। जिनके परिवार के लिए संवेदना के दो बोल भी मुख्यमंत्री से नही कहलवाये गये।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस बात से भी अवगत नही हुए कि जालौन जिले के कालपी क्षेत्र में फिर डकैत समस्या सिर उठाने लगी है। 17-18 बदमाशों का गैंग जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं और जिसके पास पर्याप्त संख्या में राइफल आदि खतरनाक असलहे भी हैं। लगातार विचरण कर रहा है। यह गैंग दुर्दमनीय रूप धारण करे इसके पहले एक साथ कई थानों और पीएसी को उतारकर बड़ा अभियान चलाने की घोषणा होनी चाहिए थी। पर मुख्यमंत्री ने इतनी बेखबर समीक्षा की कि कानून व्यवस्था संबंधी बैठक में इसकी चर्चा तक नही हुई। उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज के निरीक्षण में मजाक किया गया। मुख्यमंत्री कोई चिकित्सा विशेषज्ञ नही हैं जो केवल पांच, दस मिनट में यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं का संज्ञान उन्हें हो जाता। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के पहले ही मेडिकल कालेज में सब ओके है कहकर अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इतना आश्वस्त कर दिया था कि वे निरीक्षण की खानापूर्ति का आरोप अपने ऊपर मढ़वा कर तत्काल वापस लौट गये। लीपापोती की इसी साजिश के चलते मीडिया को उनके निरीक्षण के समय मेडिकल कालेज मे न केवल उन्हें घुसने नही दिया गया बल्कि पुलिस से उनके खिलाफ बल प्रयोग भी कराया गया। यह निदंनीय है। उन्होंने कहा कि यही स्थिति जिला पंचायत में जन प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात के दौरान रही। फरियादियों को ज्ञापन देने से रोकने के लिए उन पर हाथ उठाने तक में कोताही नही बरती गई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित वारिस कमेटी के 80 वर्षीय अध्यक्ष रणवीर सिंह बंगरा तक के साथ जिला पंचायत गेट पर झूमाझटकी करके हृदय हीनता की इंतहा कर दी गई। उन्होंने कहा कि इस तरह योगी सरकार ने अपनी जन विरोधी मानसिकता को उजागर किया है। धरने में इन मुददों पर भी जन जागरण किया जायेगा।

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