उरई। जिला पंचायत सदस्य और समाजवादी युवजन सभा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव दीपराज गुर्जर ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले के दौरे को सुपर फ्लाप बताया। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ अपनी दलित और पिछड़ा विरोधी नीतियों से इतने अलोकप्रिय हो चुके हैं कि उनकी सभा के लिए गांव-गांव से बसों से पब्लिक को ढोकर लाने की व्यवस्था की गई थी। फिर भी लोग नही आये। दो-तीन हजार की भीड़ में उनकी सभा निपट गई। जिनमें केवल लाभार्थी और उनके परिजन शामिल रहे।
दीपराज गुर्जर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ अपने आप को जन नेता की बजाय अवतारी पुरुष समझते हैं। जिसके कारण उन्हें गुमान है कि लोग केवल उनके दर्शन से धन्य हो जाते हैं। उनके आगमन के समय प्राकृतिक आपदा से जनपद में किसानों को पक कर तैयार फसलों का भारी नुकसान झेलना पड़ा। कई किसानों की जान सदमें से चली गई। लेकिन मुख्यमंत्री के मुंह से उनके लिए अफसोस के दो बोल तक नही निकले।
दीपराज गुर्जर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिन योजनाओं का लोकार्पण कर स्वयं वाहवाही लूटने की कोशिश की है वे सभी सपा सरकार द्वारा शुरू कराई गईं थीं। मुख्यमंत्री को अखिलेश सरकार के श्रेय पर डाका डालने के लिए शर्म आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निरंकुश और भ्रष्ट अधिकारियों की कठपुतली हैं। जिन्होंने अपनी पोल न खुलने देने के लिए उनके हर कार्यक्रम को मीडिया की छाया से बचाने की कोशिश की और मुख्यमंत्री इसमें हस्तक्षेप तक न कर सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के भाषण के समय वे फरियादी पीटे जा रहे थे जो उन्हें ज्ञापन देने के लिए पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनको पिटते और रोते हुए देखा फिर भी मंच से अधिकारियों को उनके साथ ठीक व्यवहार करने और उनका ज्ञापन लेने का निर्देश देने की जरूरत नही समझी। इसके पहले किसी मुख्यमंत्री ने इस तरह का अहंकार नही दिखाया।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज में सारी व्यवस्था चरमाराई हुई थी जिसके कारण तीन दिन पहले ही तत्कालीन प्राचार्य को हटाया गया था। फिर भी मुख्यमंत्री ने मेडिकल कालेज का गहन निरीक्षण करने की बजाय पांच मिनट में दौरा निपटा दिया।
उन्होंने कहा कि इंतहा तो यह हुई कि जन प्रतिनिधियों से मुलाकात में भाजपा तक के नेताओं को अधिकारियों की असलियत बताने से रोका गया। जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही की चरमसीमा व्याप्त है लेकिन इसके बावजूद मुख्यमंत्री को एक दृष्टांत ऐसा नही मिला जिसमें वे किसी अधिकारी पर कार्रवाई पर जरूरत समझते क्योंकि अधिकारी लूट का हिस्सा ऊपर तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गड़बड़ी की जानकारी जन प्रतिनिधियों को देने का आवाहन लोगों से करके उन्होंने जनता के जख्मों पर नमक छिड़का है। क्या मुख्यमंत्री को नही पता कि मेडिकल कालेज में अव्यवस्थाओं का मुख्य कारण यह था कि पूर्व प्राचार्य उनके जन प्रतिनिधियों को महीना बांधे थे। यही हाल अन्य विभागों का भी है। भाजपा के जन प्रतिनिधि अकाल के भूखों को भी मात करने वाले हैं और मुख्यमंत्री भी ऐसे ही कुछ कारणों से विकास कार्यों में होने वाली लूट में दखल नही देना चाहते जिसके कारण जन प्रतिनिधियों को गड़बड़ियां बताने की सलाह जनता को वे बहुत नादान समझकर दे रहे हैं जिसका जबाव जनता उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में मय शूद के देगी।






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