सिरसाकलार-उरई। भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर का 127वां जन्मदिन डा. अंबेडकर बालिका इंटर कालेज में धूमधाम से मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कैबिनेट मंत्री चैनसुख भारती मौजूद रहे।
इस अवसर पर चैन सुख भारती ने कहा कि बाबा साहब भारत रत्न नही विश्व रत्न के रूप में पूरे दुनियां में नवाजे जा रहे हैं। कहीं भी भेदभाव के खिलाफ आवाज उठती है तो लोग बाबा साहब के नाम की चर्चा करना नही भूलते। अमेरिका स्थित दुनियां की सबसे बड़ी कोलंबिया यूनिवर्सिटी में इसके ढाई सौ वर्ष के इतिहास में सबसे बुद्धिमान छात्र के रूप में बाबा साहब की प्रतिमा लगाकर उन्हें नालेज आफ सिम्बल कहा गया है। बाबा साहब ने न केवल जाति बल्कि लैगिंक भेदभाव के खिलाफ भी संघर्ष किया और हिंदू स्त्रियों के अधिकार के मुददे पर ही उन्होंने अपना इस्तीफा केंद्रीय मंत्रिमंडल को सौपा था।
चैनसुख भारती ने कहा कि वे मेहनतकश लोगों के अधिकारों के लिए भी संघर्षरत रहे। वायसराय की कौंसिल में श्रम मंत्री रहते हुए उन्होंने मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए नियम बनाये जिन्हें आधुनिक लेबर कानून की नींव माना जाता है।
चैन सुख भारती ने कहा कि बाबा साहब ने असली संविधान के तौर पर जो मेमोरंडम आजादी के पहले वायसराय को सौंपा था आज उस पर अमल की जरूरत है। जिसमें शिक्षा, खेती और बुनियादी उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र में देने की वकालत की गई है। उन्होंने कहा कि अंधाधुंध निजीकरण गरीब जनता के लिए घातक बन चुका है। जिससे उबरने के लिए बाबा साहब के विचार सर्वाधिक प्रासंगिक हैं।
श्याम सुंदर शर्मा पूर्व प्रधान दमरास, राजीव पांडेय प्रधान मलथुआ, कमल दोहरे बसपा नेता, राधेश्याम, तेजराम, डीडी खान कालेज के प्रिसिंपल सुशील आदि मौजूद रहे।
उधर कालपी में सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों तथा अन्य संस्थाओं में बाबा साहब की जयंती धूमधाम से मनाई गई। नगर के बाइपास चैराहा स्थित प्रतिमा पर नगर पालिका अध्यक्ष के प्रतिनिधि जगजीवन राम अहिरवार, हिम्मत सिंह, लल्लन आदि ने माला पहनाई। नगर पालिका भवन में भी बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। तहसील सभाकक्ष में उप जिलाधिकारी सतीश चंद्र की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ। लाला हरदौल के चबूतरे पर विहिप के नगर अध्यक्ष ऋषि मेहरोत्रा ने बाबा साहब को प्रेरक व्यक्तित्व बताया। नरेंद्र मोदी विचार मंच के प्रांतीय मंत्री अरविंद राठौर ने कहा कि बाबा साहब जाति विशेष के नही सर्वमान्य महापुरुष हैं।

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