उरई। जिले में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाकर मौरम खनन शुरू कर दिया गया है। इतना ही नहीं घाटों से ओवरलोड ट्रक भरकर निकाले जा रहे हैं जिससे पहले की तरह ही सड़के क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। यह आरोप किसी विपक्षी नेता का नही है और न ही यह मीडिया की चर्चा है। इसका खुलासा तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ही नेता ने जिलाधिकारी को भेजे शिकायती पत्र में किया है। जिसकी प्रतिलिपियां मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनन, खनिज मंत्री व अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी गई हैं।
अवैध मौरम खनन और ओवर लोडिंग पर रोक लगाने के बड़े-बड़े दावे मौजूदा सरकार ने किये थे। लेकिन जमीनी हकीकत सामने आने पर ये सारे दावे लफ्फाजी साबित हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के कदौरा मंडल के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद पाल के शिकायती पत्र को सही मानें तो जिले में पिछली सरकार की तरह ही नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अंधाधुंध खनन शुरू हो गया है।
भाजपा नेता जगदीश प्रसाद पाल ने अपने पत्र में बताया कि जिले में सबसे अधिक मौरम खनन घाट कदौरा क्षेत्र में बसरेही, हेमंतपुरा, पथरेहटा, बड़ागांव, भेड़ी आदि में हैं जहां पर पोकलेंड तथा जेसीबी से ट्रक लोड किये जाते हैं। जबकि एनजीटी के दिशा निर्देशों के मुताबिक मशीनों की बजाय यह कार्य मजदूरों से कराया जाना चाहिए। गत दिनों जब एक ट्रक में हाइटेंशन लाइन छू जाने से एक ड्राइवर की मौत हो गई थी उस समय खुलासा हुआ था कि विद्युत दुर्घटना का शिकार होने वाले ट्रक में पोकलैंड मशीन लदी थी जो कि पास के मौरम घाट पर ले जाई जा रही थी। लेकिन अधिकारियों ने मौरम ठेकेदारों से सांठगांठ के कारण इस खबर को नजरअंदाज कर दिया था।
जगदीश प्रसाद पाल ने कहा है कि जिम्मेदार अधिकारी अवैध रूप से किये जा रहे खनन और ओवर लोडिंग का तमाशा चुपचाप बैठकर देख रहे हैं जिससे उनकी नीयत पर प्रश्न चिन्ह खड़े होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि मशीनों से खनन के कारण बची-खुची बेतवा का भी सत्यानाश हो जायेगा और ओवर लोड वाहन चलने से जोल्हूपुर-हमीरपुर हाइवे भी सुरक्षित नही बचेगा। इसलिए समय रहते इस पर रोक जरूरी है। अब देखना यह है कि प्रदेश सरकार अपनी पार्टी के चैनल से आई शिकायत पर भी कोई कार्रवाई करना गंवारा करती है या नही।






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