उरई। सरकार की धोखाधड़ी और वायदा फरामोशी की एक और मिसाल सामने आई है। समाजवादी पार्टी के शासन में पनपे भू-माफियाओं पर अंकुश लगाने और अवैध कब्जे खाली कराने की डींग हांककर विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया था। इसलिए सरकार बनने के बाद योगी सरकार ने भू-माफियाओं के विरुद्ध जमकर हुंकार भरी जिससे लोगों को तमाम उम्मीदें जगी थीं। लेकिन हकीकत में इसके दावे फरेब साबित हुए हैं। इंतहा यह है कि मौजूदा सरकार ने राजस्व विभाग में उन अधिकारियों की पोस्टिंग महत्वपूर्ण स्थानों पर की है जो रिकार्ड की बाजीगरी करके माफियाओं की मदद करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। उरई में रामनगर के कब्रिस्तान में हुए अतिक्रमण को लेकर इसी वजह से कार्रवाई न हो पाने के चलते जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को दर्जनों लोगों ने इस बारे में एक बार फिर जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया।
रामनगर में अनुसूचित जाति छात्रावास के पास कब्रिस्तान में लगभग 6 लोगों के अवैध कब्जे का तथ्य इसके लिए बनाई गई जांच टीम की छानबीन में उजागर हुआ था। यह बताते हुए कब्रिस्तान वक्फ के अध्यक्ष मोहम्मद इसलाम खां ने जिलाधिकारी को गत दिनों एक ज्ञापन देकर अवैध कब्जा धारकों को बेदखल कराने की मांग की थी।
इस पर जिलाधिकारी के निर्देश के बाद अपर जिलाधिकारी ने तहसीलदार से जांच कराई लेकिन हेराफेरी के उस्ताद के रूप में मशहूर हो चुके तहसीलदार ने गोलमोल रिपोर्ट तैयार करके उच्चाधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया। इसलाम खां का आरोप है कि अवैध कब्जा धारकों द्वारा कब्रें खत्म करके गहरे गडढे कर दिये गये है जो कि नाकाबिले बर्दास्त है। इसलाम खां के साथ मो. सलीम, नासिर अली, नफीस, हकीम, मो. फिरोज, मुबारक मंसूरी, मकबूल हसन, नबाब और चांद मंसूरी आदि भी थे। जिलाधिकारी ने एक बार फिर इस मामले में जांच और कार्रवाई के आदेश जारी किये हैं।

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