उरई। मध्यप्रदेश के सीमवर्ती थाना क्षेत्र में पुलिस रेत माफियाओं की सेवादारी में लगी हुई है। जिसका एक उदाहरण रेढ़र पुलिस के कारनामे हैं। मध्यप्रदेश की सीमा में पहूज व सिंध नदियों में खनन करके रेत लाने वाले डम्फर और ट्रैक्टर रेढ़र पुलिस की पहरेदारी में यहां से होकर निकाले जा रहे हैं। क्षेत्रीय जनता मेें इसे लेकर आक्रोश व्याप्त है क्योेंकि दिन भर और रात भर रेत से भरे वाहनों के निकलने के कारण इलाके की सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है जिस पर पैदल चलना तक दूभर होने के हालात बन गये हैं।
बताया जाता है कि रेढ़र पुलिस का इन दिनों बुरा आलम हैं। थानाध्यक्ष अजय कुमार सुबह से ही खुमारी में चले जाते हैं। उनके सेंकंड अफसर ही थाने के असली कर्ताधर्ता बने हुए हैं जिनके संरक्षण में गलत कामों से जमकर कमाई की जा रही है। पुलिस का ध्यान पूरे दिन रेत भरे वाहनों को निकलवाने पर रहता है क्योंकि एक डम्फर के एक फेरे का पांच हजार और ट्रैक्टर के एक फेरे का दो हजार रुपये पुलिस वसूलती है।
ज्ञात हो कि रेढ़र थाना जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर दुर्गम इलाके मे है जहां वरिष्ठ अधिकारियों का आवागमन कम हो जाता है। इसलिए थाना पुलिस मनमाने ढंग से ऊपरी कमाई के लिए कार्य कर रही है। अवैध बालू के साथ-साथ अवैध शराब के परिवहन में भी उसके द्वारा पूरा सहयोग दिया जा रहा है। रेढ़र से होकर ग्वालियर तक दो बसे भी चल रही हैं जिनके परमिट नही हैं। लेकिन पुलिस का रुपया मिलता है जिसकी वजह से कोई रोक-टोक नही होती।
क्षेत्रीय जनता ने गोपनीय रूप से पुलिस अधीक्षक सहित विभाग के उच्चाधिकारियों और डीएम को पत्र भेजे हैं। जिनमें रेढ़र पुलिस की करतूतों का खुलासा करते हुए मांग की गई है कि वे अपने सूत्रों से इसकी पुष्टि कर दागी पुलिस स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करें तांकि खाकी में लोगों का भरोसा बहाल रह सके।

Leave a comment