
उरई। उत्तर प्रदेश जल निगम समन्वय समिति लखनऊ के आवाहन पर कार्यालय अधिशाषी अभियंता उरई खंड में दस सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया गया।
धरना सभा की अध्यक्षता करते हुए इंजी ओमवीर सिंह ने कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण दुर्भाग्य से प्रदेश की ग्रामीण आबादी 54 प्रतिशत के सापेक्ष मात्र 13.7 प्रतिशत आबादी ही शुद्ध पेयजल से अच्छादित है। उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में पेयजल के रूप में प्रयोग होने वाले भूजल का पहला स्टेटा तीस वर्ष पूर्व प्रदूषित हो चुका है एवं दूसरा स्टेटा भी लगभग प्रदूषित हो चुका है। सामान्य एवं समरसेबिल हेतु की गई घरेलू बोरिंग एवं इंडिया मार्क हैंडपंप दूसरे स्टेटा से पानी उठाते है। रासायनिक या जैविक प्रदूषित के मुक्त जलापूर्ति का एक मात्र श्रोत प्रदूषण मुक्त स्टेटा से निकला हुआ या सतही क्षेत्र से संग्रह व हानिकारक प्रदूुषित से शोधित पाइप पेयलज है जो राजकीय पाइप पेयजल के माध्यम से जन साधारण को सुलभ कराया जाता है। उक्त भीषण समस्या का एक मात्र कारण प्रदेश में जन स्वास्थ्य अभियंत्रण हेतु एक मंत्रालय का एवं प्रदेश स्तर पर नियामक संस्था का न होना है। उन्होंने जन स्वास्थ्य को देखते हुए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु स्वतंत्र मंत्रालय एवं शासकीय विभाग को नितांत आवश्यकता है। जब तक जल निगम को पूर्व की भांति सरकारी विभाग नही बनाया जाता तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर इंजी आलोक पटेल, इंजी. हिमांशु शेखर मौया, इंजी शिवम कुमार, इंजी. संजय कमल, इंजी सतेश कुमार, कु शिखा पांडेय, कमलेश, लालाराम, रामबाबू, बलवीर, उदय सहित समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे है।






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