उरई। बजट की कमी के कारण जिले में महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण बार-बार अटक जाता है जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
सरकार के मामले में घर में नही हैं दाने, अम्मा चली भुनाने की कहावत चरितार्थ हो रही है। सरकार विकास का दम तो भरती है लेकिन उसके पास बजट का टोटा पड़ जाता है। ऐसे में विकास का राग थोथे गाल बजाने से ज्यादा अहमियत नही दिखा पा रहा है। हालत यह है कि नये विकास कार्य कराना तो दूर सपा के कार्यकाल में शुरू हुए विकास कार्य भी एक वर्ष गुजर जाने के बावजूद यह सरकार पूरे नही करा सकी है।
समाजसेवी धर्मेंद्र सक्सेना ने लोक निर्माण विभाग से उरई-जालौन हाइवे के बनने की स्थिति के बारे में पूंछा था। जिसे लेकर लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता अविनेश कुमार ने उन्हें बताया कि उरई-जालौन फोरलेन निर्माण में राइट हैंड साइड पर दो लेन का कार्य तीन किलो मीटर छोड़कर पूर्ण करा लिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि शेष कार्य बजट का आवंटन मिलने पर ही पूरा हो पायेगा।
यही हालत कोटरा क्षेत्र में सिकरी व्यास में बन रही सीसी रोड की है। मौरम खनन क्षेत्र की इस सड़क के सीसी हो जाने से स्थायित्व आ जाने की उम्मीद लोग लगाये थे। लेकिन इसका कार्य अचानक बीच में ही रोक दिया गया। यहां भी वजह बजट का टोटा है। लोग पूंछ रहे है कि पिछली सरकार में विकास के लिए बजट का टोटा नही होता था जबकि उस समय आरोप यह था कि सत्तारूढ़ पार्टी के लोग सारे काम दो नंबर में कर रहे हैं जिससे खजाने में पैसा नही पहुंच पा रहा। अब जबकि दो नंबर के व्यापार को सभी क्षेत्रों में बंद करने का दावा किया जा रहा है और बेहतर तरीके से कर वसूली हो रही है। तो सरकारी बजट कहां गायब होता जा रहा है इसका जबाव मौजूदा सरकार को देना चाहिए।

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