उरई। सिरसाकलार थाना क्षेत्र में पुलिस की मिली भगत से गांव-गांव में गैस रिफलिंग का अवैध धंधा चल रहा है। यहां तक थाना मुख्यालय में ही इसके पांच ठिकाने हैं। जिससे किसी दिन क्षेत्र में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
सिरसाकलार और उसके आसपास दमरास, न्यामतपुर, मलथुआ आदि सड़क के किनारे बड़े गांवों में रिफलिंग की दुकानें खुली हुई हैं जिसमें दो से लेकर चार तक पंप मिलेगें। सभी दुकानों में चहेतों की गैस किताबों की व्यवस्था रहती है। उन्हीं किताबों से दुकानदार सिलण्डर उठा लेते हैं। दुकानदार को एक सिलण्डर में डेढ़ सौं से लेकर दो सौं रुपये तक का मुनाफा ब्लैक वसूलने से होता है। रिफलिंग से बची हुई गैस से किताब धारक के घर में मुफ्त में खाना बनता है और आम के आम गुठलियों के दाम की तर्ज पर उसके खाते में सब्सिडी भी जमा हो जाती है।
रिफलिंग के खेल से कई लोगों की जाने जा चुकी हैं। फिर भी जिम्मेदार विभाग स्वार्थवश इसकी अनदेखी कर रहे हैं। जिले में कहीं भी सीएनजी का पंप न होते हुए भी गैस किट के वाहन चल रहे हैं जो कि अवैध हैं। पुलिस को इसमें महीना मिलता है। अगर कभी धरपकड़ करनी पड़ती है तो 15 से 20 हजार की वसूली कर बिना कार्रवाई किये दुकानदार को छोड़ दिया जाता है।





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