उरई। मौरम के गैर कानूनी तरीके से खनन के व्याघात से बेतवा के अस्तित्व पर बन आई है। बुंदलेखंड की बेतवा सबसे बड़ी सदानीरा नदी है जो भीषण गर्मी के महीनें में भी लबालब रहती है। लेकिन मनमाने खनन ने नदी के वजूद पर ग्रहण लगा दिया है।
जालौन जिले में 22 खनन क्षेत्र है। जिनमें से आठ के ही टेंडर हो पाये हैं। कुछ क्षेत्रों में टेंडर किसी खंड का हुआ है और मौरम किसी खंड से उठाई जा रही है। टेंडर की किसी भी शर्त का पालन अधिकांश खण्डों पर नही हो रहा लेकिन अधिकारी इसको नजरअंदाज किये हुए हैं।
मुहाना में सारे नियमों को तांख पर रखकर हो रहा खनन इसका उदाहरण है। यहां न तो खनन क्षेत्र में तार फैंसिंग है न ही कोई बोर्ड लगाया गया है। सीसीटीवी कैमरे भी नही हैं और न ही ओवर लोडिंग रोकने के लिए धर्मकांटा लगाया गया है। एनजीटी ने अनापत्ति प्रमाणपत्र देते समय खनन कंपनी से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के पहले यह इकरार कराया था कि मशीनों का प्रयोग करके नदी धारा को बदलने की कोई कोशिश नही की जायेगी। लेकिन मुहाना में सरेआम पोकलैंड मशीनों का प्रयोग नजर आता है।
‘‘खनिज विभाग नियमों के विपरीत खनन न होने देने के लिए कटिबद्ध है। शिकायतों की जांच की जायेगी आरोप सही होने पर खनन लाइसेंस निरस्त करने सहित कड़े कदम उठाये जायेगें।’’
-राजेश कुमार खनिज अधिकारी जालौन
‘‘खनन के लिए नदी में मशीनों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। मौके पर जाकर निगरानी कराने की व्यवस्था है। जिसमें पोकलैंड मशीन से खनन उजागर होने पर कड़ी कार्रवाई होगी।’’
-पीके सिंह अपर जिलाधिकारी जालौन






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