* हिंदी पत्रकारिता दिवस पर याद किये गये पत्रकारिता के पुरोधा गणेशशंकर विद्यार्थी

कोंच-उरई । हिंदी पत्रकारिता दिवस पर यहां पत्रकारों ने संगोष्ठी आयोजित कर पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुये इसे मिशन की तरह पाक साफ रखे जाने की जरूरत पर बल दिया। बतौर मुख्य अतिथि तहसीलदार भूपाल सिंह ने कहा कि सत्य बोलने और लिखने की प्रवृत्ति में आ रही कमी के कारण स्थितियां बिगड़ती जा रहीं हैं। पत्रकार का दायित्व है कि वह सत्य के आसपास रहकर ही अपनी लेखनी चलाये ताकि समाज के सामने किसी भी घटना की सही तस्वीर आ सके। उन्होंने पत्रकारिता के व्यवसायीकरण पर चिंता जाहिर करते हुये कहा कि ऐसी स्थितियों में पत्रकारिता निश्चित रूप से अपने मिशन से भटकी हुई महसूस होती है।

अशोक शुक्ला महिला महाविद्यालय में बीती देर शाम उपजा तहसील इकाई के तत्वाधान में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पत्रकारिता के पुरोधा गणेशशंकर विद्यार्थी के पत्रकारिता के क्षेत्र में दिये गये योगदान को याद किया गया। उपजा अध्यक्ष अंजनी श्रीवास्तव की अध्यक्षता और ओमप्रकाश उदैनिया के संचालन में संजोई गई संगोष्ठी को बतौर बिशिष्टï अतिथि संबोधित करते हुये कोतवाल कोंच विनोदकुमार मिश्रा तथा ऐल्डर्स कमेटी के बरिष्ठ सदस्य संतलाल अग्रवाल ने कहा कि स्वातंत्र्य समर में हिंदी पत्रकारिता के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। अपने लंबे सफर में हिंदी पत्रकारिता ने पत्रकारिता के मानदंडों को शिखर तक पहुंचाया और इसमें छोटे छोटे इलाकाई पत्रकारों की अहम् भूमिका है। उन्होंने भी सत्य के उद्घाटन पर जोर दिया। पूर्व बारसंघ अध्यक्ष विनोद अग्निहोत्री, पूर्व भाजपा अध्यक्ष कमलेश चोपड़ा, सपा नेता सरनामसिंह यादव, कांग्रेसी नेता अनिल वैद, पत्रकार रमेश तिवारी, पुरुषोत्तमदास रिछारिया, असद अहमद, ऋषि झा आदि ने पत्रकारों के साथ होने बाली हिंसक घटनाओं पर चिंता जताते हुये कहा कि भले ही पत्रकारों के नाना प्रकार के संगठन हों लेकिन जब बात पत्रकारों की अस्मिता और सम्मान की हो तो सभी पत्रकारों को एक मंच पर आकर अपनी एकता प्रदर्शित करनी चाहिये। इस दौरान कांग्रेसी नेता प्रमोद शुक्ला, सपा नेता हरिश्चंद्र तिवारी, शेखर शुक्ला, अनिल मिश्रा, अभिषेक रिछारिया, संजय सोनी, रवि दुवे, शैलेन्द्र पटैरया, वरुण सेठ, दिलीप पटेल, दुर्गेश कुशवाहा, सौरभ मिश्रा, करुणानिधि शुक्ला, राहुल राठौर, जितेन्द्र यादव, शैलेन्द्र पटैरया, तरुण निरंजन, बाबूराम पाल, हरीमोहन याज्ञिक, हरिओम याज्ञिक, नवीन कुशवाहा, पवन अग्रवाल, कृष्णकांत कुशवाहा, बड़े परिहार, हरगोविंद पटेल खुराना, रानू राजा सहित डेढ दर्जन पत्रकार उपस्थित रहे।

 

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