
कोंच-उरई । गुजरी 15 जून से गेहूं की सरकारी खरीद बंद होने के बाद भी कतिपय गेहूं क्रय केन्द्रों पर चोरी छिपे गेहूं तौले जाने की शिकायतों पर डीएम के निर्देश पर सोमवार को एसडीएम ने कोतवाली पुलिस के साथ मंडी स्थित नैफेड क्रय केन्द्र पर छापा मारा और वहां बेमानी तरीके से तौला जा रहा गेहूं पकड़ लिया। एसडीएम की गाड़ी आती देख केन्द्र प्रभारी ने आनन फानन लेबर को अंदर ही बंद कर दिया और गेट पर ताला मार कर भाग गया। अधिकारियों ने जब ताले तुड़वाने का प्रयास किया तो अंदर बंद लेबर लेबर ने गेट खोल दिया। अंदर तकरीबन चालीस कुंतल गेहूं ढेर की शक्ल में पड़ा था जबकि 105 बोरियां तौल कर भरी जा चुकी थीं। फोन करके केन्द्र प्रभारी को बुलाया गया लेकिन काफी देर बाद भी जब केन्द्र प्रभारी मौके पर नहीं आया तो एसडीएम ने वहां पुलिस का पहरा बिठा दिया। केन्द्र पर मिला अभिलेखों का थैला भी एसडीएम अपने साथ ले गये। बताया गया है कि प्रमाणित रजिस्टर पर किसी भी प्रकार की इंट्री नहीं मिली है। एसडीएम ने माना है कि गड़बड़ी है जिसमें नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
जिले के आला अधिकारियों तक इस तरह की शिकायतें पहुंच रही थीं कि गेहूं की सरकारी खरीद 15 जून को बंद कर दिये जाने के बाबजूद कतिपय केन्द्र चोरी छिपे गेहूं की तौलाई कर सरकार को चूना लगाने में लगे हैं। शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लेकर सोमवार को डीएम डॉ. मन्नान अख्तर ने स्थानीय प्रशासन को छापा मारने के निर्देश दिये थे। तकरीबन साढे दस बजे एसडीएम लल्लनराम ने कोतवाल विनोदकुमार मिश्रा, मंडी चौकी इंचार्ज वीरेन्द्रसिंह तथा भारी पुलिस बल के साथ मंडी स्थित क्रय केन्द्र पर छापा मारा। चूंकि एसडीएम नैफेड क्रय केन्द्र के बाबत जानते नहीं थे तो उन्होंने पीसीएफ केन्द्र पर धावा बोल दिया और केन्द्र प्रभारी को हड़का दिया। केन्द्र प्रभारी अवधलाल ने बताया कि यहां मसूर और चने की खरीद हो रही है जो 30 जून तक जारी रहेगी तो एसडीएम वहां से हट गये और नैफेड केन्द्र की तरफ कूच कर दिया। एसडीएम की गाड़ी आती देख नैफेड प्रभारी संजीव पटेल ने आनन फानन गेट के शटर डाल दिये और वहां से नदारत हो गया। जल्दबाजी में अंदर काम कर रहे मजदूर भी अंदर ही बंद हो गये। अधिकारियों ने गेट के ताले तुड़वाने का जब प्रयास किया तो लेबर ने गेट खोल दिये। एक महिला सहित आठ मजदूर जो केन्द्र के भीतर तौलाई कर रहे थे, को एसडीएम ने कोतवाली भिजवा दिया था लेकिन बाद में उन सभी को मुचलकों पर छोड़ दिया गया। केन्द्र के अंदर का नजारा ही अलग था, अंदर तौलाई का काम हो रहा था। इस बात की तस्दीक हालिया तौली गई 105 बोरी वहां रखी थीं और लगभग चालीस कुंतल गेहूं ढेर की शक्ल में पड़ा हुआ था। वहां पड़े बारदाने पर छापे लगाये जाने के भी चिन्ह मिले, जबकि 642 खाली बोरियां भी अधिकारियों को मिलीं। एसडीएम ने वहां मौजूद मंडी सचिव से केन्द्र प्रभारी को बुलाने के लिये कहा। सचिव ने कई दफा फोन भी किया लेकिन प्रभारी वहां नहीं पहुंचा जिसके चलते एसडीएम ने वहां पुलिस का पहरा बिठा दिया है। एसडीएम ने पूरे मामले से उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया है और मंडी सचिव डॉ. दिलीपकुमार वर्मा को पूरी रिपोर्ट बना कर डीएम को भेजने के निर्देश दिये हैं।
गड़बड़ी करने बालों पर होगी कड़ी कार्यवाही-एसडीएम
इस समूचे मामले को लेकर एसडीएम का रुख काफी सख्त है, उन्होंने कहा है कि सरकारी खरीद बंद होने के बाद भी केन्द्र पर तौलाई होना गंभीर मामला है और प्रशासन इस मामले में सख्त कार्यवाही करने का मन बना चुका है। पूरे मामले की वीडियोग्राफी कराई गई है और उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। मंडी प्रशासन को भी निर्देशित किया गया है पूरी रिपोर्ट बना कर जिलाधिकारी महोदय को भेजने के लिये।
खूब घनघनाये नेताओं के फोन
सोमवार को एसडीएम लल्लनराम ने जैसे ही मंडी सचिव और पुलिस के साथ नैफेड क्रय केन्द्र पर छापा मारा बैसे ही उनके पास नेताओं के फोन घनघनाने लगे और मामले को दबाने के प्रयास होने लगे लेकिन एसडीएम ने नेताओं को टका सा जबाब देकर उनकी बोलती बंद कर दी। हालांकि अभी भी नेताओं ने हार नहीं मानी है और वे एसडीएम ऑफिस की गणेश परिक्रमा करने में लगे हैं लेकिन एसडीएम ने पत्रकारों से दो टूक कहा है कि किसी को बख्शा नहीं जायेगा और नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
रात में ढुलाई और दिन में तौलाई
सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के वायदे भले ही किये हों लेकिन क्रय केन्द्रों ने किसानों को मिलने बाला लाभ व्यापारियों को दिया और अपनी जेबें खूब भरी हैं। किसानों की अगर मानें तो वे हफ्तों केन्द्रों पर पड़े अपनी बारी का इंतजार ही करते रहे और केन्द्र प्रभारियों तथा व्यापारियों के काकस ने मिल कर सरकारी धन की जमकर लूट की है। रातों के अंधेरे में व्यापारियों का माल केन्द्रों तक पहुंचता रहा और दिन में उसी माल को किसानों का बता कर तौला जाता रहा है। अगर देखा जाये तो इस सरकारी खरीद का लाभ किसानों को कम व्यापारियों और केन्द्र प्रभारियों को अधिक मिला है।
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