
कोंच-उरई । कहने को तो सरकार किसानों की हितैषी होने के दावे करती नहीं थक रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। चना मसूर जैसी जिन्सों की खरीद में हाथ डाल कर सरकार ने किसानों को बाजार के मुकाबले कहीं अधिक समर्थन मूल्य देने की घोषणा तो कर दी लेकिन उसकी नीयत में पासंग साफ नजर आ रहा है। जिले भर में केवल दो ही केन्द्र कालपी और कोंच में बनाये गये थे और खरीद के लिये मात्र डेढ महीने का समय जो अब लगभग बीतने को है। सिर्फ पांच दिन और खरीद करने के बाद क्रय केन्द्रों में ताले पड़ जायेंगे जबकि अब तक लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ साढे छह फीसदी ही खरीद हो सकी है जिससे किसान काफी खफा है और उसने सरकार से मांग की है कि खरीद की समय सीमा कम से कम एक महीने और बढाई जाये ताकि किसान अपनी उपज का बाजिब मूल्य प्राप्त कर सकें।
पीसीएफ क्रय केन्द्र कोंच में सैकड़ों किसान अभी भी अपनी बारी की प्रतीक्षा में हैं कि कब उनका नंबर आये और वे अपनी चना मसूर की उपज समर्थन मूल्य पर बेच सकें, लेकिन क्रय केन्द्र पर जो हालात बने हैं उनमें लगता है कि दर्जन भर किसान भी अपनी उपज बेच पायें तो बहुत बड़ी बात होगी। केन्द्र प्रभारी अवधलाल की अगर मानें तो उसे 50 हजार कुंतल चना मसूर की खरीद का लक्ष्य दिया गया है जिसमें 2 हजार 444 कुंतल मसूर तथा 785 कुंतल चना की ही खरीद हो सकी है। इन आंकड़ों पर गौर करें तो दिये गये लक्ष्य का यह मात्र साढे छह फीसदी के आसपास है। खरीद के लिये डेढ महीने का समय दिया गया था यानी आगामी 30 जून को खरीद का काम बंद हो जायेगा जबकि कमोवेश पंद्रह दिन तक सर्वेयर अनिलकुमार मिश्रा के बीमार पड़ जाने के कारण खरीद का काम बंद रहा है। केन्द्र में सैकड़ों किसानों के नंबर लगे हैं जो शायद लगे ही रहेंगे और उन्हें खुले बाजार में औने पौने दामों में जिंस बेचनी पड़ेगी क्योंकि एक दिन में मात्र सात-आठ किसानों से ही लगभग दो सौ कुंतल के औसत से तौलाई हो पा रही है क्योंकि सुबह नौ से शाम पांच बजे तक ही तौलाई का काम होता है। केन्द्र पर बैठे किसानों रामशंकर अंडा, चतुरसिंह, अनुरुद्घ गुर्जर, मुकेश तिवारी, दिनेश चौबे, चंद्रपालसिंह, देवेन्द्र पिंडारी आदि का कहना है कि जिस गति से खरीद हो रही है उससे तो ऐसा लगता है जैसे सरकार ने किसानों को झुनझुना पकड़ा कर बहलाने की कोशिश की हो। किसानों को इस क्रय केन्द्र का रत्ती भर भी लाभ नहीं मिला है लिहाजा अगर सरकार की वास्तव में मंशा साफ है कि किसानों का भला हो तो उसे खरीद की समय सीमा कम से कम एक माह और बढानी चाहिये।
सर्वेयर के बीमार पडऩे से तौल का काम प्रभावित हुआ
केन्द्र प्रभारी अवधलाल ने माना, सर्वेयर के बीमार पडऩे से तौल का काम प्रभावित हुआ है लेकिन उसमें वह कर ही क्या सकते थे क्योंकि बिना सर्वेयर के जिंस की तौल होना असंभव है। उनका कहना है कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ किसानों का माल तौल रहे हैं लेकिन उनकी भी कुछ सीमायें हैं जिनमें वह बंधे हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन में अधिकतम सात से आठ किसानों का माल तौला जा रहा है, इससे अधिक की उनकी क्षमता भी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि नंबर के मुताबिक ही किसानों के माल की तौलाई की जा रही है और किसी को परेशानी नहीं होने दी जायेगी।






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