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कोंच। डॉ. मृदुल दांतरे ने कबीर जयंती पर अपने विचार प्रकट करते हुये कहा कि कबीर अपने आप में एक पूरा दर्शन हैं, उनको लेकर कुछ विद्वान उन्हें नास्तिक मानते हैं तो कुछ आस्तिक लेकिन कबीर ने सबसे बड़ा धर्म मानवता को माना और उसे ही आत्मसात् करके समाज को मानवता का रास्ता दिखाने का प्रयास किया। वे निर्गुण ब्रह्मï के उपासक माने जाते हैं और वाह्य आडंबरों पर हमेशा करारे प्रहार करते रहे हैं। उनके दोहे और पूरा साहित्य इन्हीं संदेशों से ओतप्रोत है कि हमेशा पीडि़त मानवता की सेवा करनी चाहिये तभी ईश्वर भी प्रसन्न होता है। यह बात उन्होंने सेठ बद्रीप्रसाद स्मृति महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही।
सेठ बद्रीप्रसाद स्मृति महाविद्यालय में संत कबीर दास की जयंती मनाई गयी। सर्व प्रथम विद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य ब्रजेन्द्रसिंह एवं कोऑर्डिनेटर कन्हैया नीखर द्वारा कबीर दास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया। विद्यालय की छात्राओं अंजू यादव, भारती यादव, प्रियंका अग्रवाल, स्वाति नगाइच, समीक्षा पटेल आदि ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की। बीटीसी विभाग के डॉ. राघवेन्द्र पटेल ने संत कबीर के जीवन पर प्रकाश डाला, कहा कि कबीर ने खुद ही कहा है कि ‘मसि कागद छुऔ नहिं, कलम गही नहिं हाथÓ, फिर भी कबीर जैसा विद्वान साहित्य के क्षेत्र में अपना एक स्थान बनाये खड़ा हुआ है। सरताज खान, ब्रजेन्द्रसिंह निरंजन, संतोष रायकवार ने भी अपने विचार प्रकट किए। इस मौके पर निशी शुक्ला, शालिनी अहिरवार, तनु श्रीवास्तव, रीनू पटेल, प्रगति, मनीष, मुकेश, रवि, संध्या, नेहा, राधा, दीक्षा, रोहित, सरिता, आनंद, ऐनुल, मिली आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन मनोज श्रीवास्तव ने किया।

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