
गयारहवीं शरीफ पर गरीब व मजलूमों को किया कंबल वितरण
उरई । हजरत मीर मुहीउद्दीन अब्दुल कादिर जिलानी रह. की याद में राष्ट्रीय एकता का प्रतीक गयारहवीं शरीफ का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस उपलक्ष्य में पीरो वाली मस्जिद व हजरत गौसे आजम साहब की दरगाह पर भब्य मेले का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन मेला संयोजक समाजसेवी यूसुफ अंसारी एवं मेला कमेटी अध्यक्ष ने फीता काटकर किया। इससे पहले यूसुफ अंसारी ने अपने आवास पर हजरत गौसे आजम साहब की याद में गरीब-असहाय महिला व पुरुषों को कंबलों का वितरण किया गया। इस दौरान पांच दर्जन के लगभग कंबलों का वितरण समाजसेवी यूसुफ अंसारी ने अपने सहयोगी शफीकुर्रहमान कशफी, हसन खां, हलीम अंसारी, नासिर अंसारी, हई अंसारी, रियाज अहमद, सलीम अंसारी, आसिफ अंसारी, आमीन ठेकेदार, इरफान खां, फारूक खां, मुस्लिम बाबा, रहीस अहमद आदि मौजूद रहे।

हजरत गौसे आजम की याद में हजारों की संख्या में हिन्दू-मुस्लिम , महिलाओं, पुरुषों, बच्चों हजरत साहब की दरगाह पर चादर चढा व फूल पोसी करके मन्नते और देश व मुल्क की खुशहाली के लिए अमन शांति के लिए दुआएं मांगी। इस दौरान समाजसेवी यूसुफ अंसारी ने बताया कि हजरत साहब अब्दुल कादिर जीलानी रह. बड़े पीर साहब के नाम से मशहूर है जो हमेशा लोगों को सच्चाई पर चलने के लिए दर्श देते थे इसलिए लोग उन्हें सच्चाई का मसीहा जानते है। वह अपने साथियों के साथ छोटी सी उम्र में बगदाद पढ़ने के लिए जा रहे थे तो उनकी मां ने पीर साहब की सदरी में चालीस अशर्फियां सिलकर हिदायत देते हुए रख दी और कहा कि बेटा कभी झूठ नहीं मत बोलना चाहे कितनी मुसीबत आये। रास्ते में डाकू मिल गये उन्होंने सभी लोगों को रोककर पूछा तो पीर साहब ने अपनी सदरी में छुपी हुई अशर्फियां निकाल कर दे दी । बडे पीर साहब की सच्चाई से सभी डाकू हैरत में पड़ गये और सभी डाकू ने उसी दिन से गलत कार्य छोडकर सच्चाई के रास्ते पर चलने लगे । इसलिए सभी लोगों को पीर साहब के बताये हुए सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए।





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