कोंच-उरई । बुधवार को शासन द्वारा नामित किए गए नोडल अधिकारी संभागीय खाद्य नियंत्रक नरेन्द्रकुमार ने उन गांवों जिन्हें ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, में जाकर ओडीएफ की जमीनी हकीकत परखी। जिन दो गांवों का उन्होंने आज निरीक्षण किया उनमें पडऱी गांव तो ओडीएफ मिला लेकिन पनयारा गांव में अभी भी कार्य प्रगति पर होता मिला।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत समेचे प्रदेश को ओडीएफ बनाने के लिए शासन ने अरबों रुपया खर्च किया है और अधिकारियों की पूरी फौज को इस काम में लगाया गया है। हालांकि जिले को ओडीएफ करने की औपचारिक घोषणा पहले ही कर दी गई है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी तमाम गांव ऐसे हैं जिनमें वक्त और पैसे की दरकार है। जिन गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है उन गांवों का भौतिक सत्यापन करने के लिए शासन द्वारा नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। संभागीय खाद्य नियंत्रक नरेन्द्रकुमार को कोंच विकास खंड के दस गांवों का सत्यापन मिला है जिसमें उन्होंने बुधवार को दो गांवों में जाकर हकीकत परखी। पडऱी गांव में स्थिति उन्हें ठीक मिली लेकिन पनयारा में स्थिति ठभ्क नहीं मिली। वहां अभी भी बहुत सारा काम होना शेष है। उन्होंने बताया कि अभी उन्हें आठ गांव और देखने हैं, जो भी स्थिति होगी उससे शासन को अवगत करा दिया जाएगा।

 

एक दाने की भी खरीद नहीं हो सकी धान की

किसानों की सुविधा और उन्हें उनकी उपज का बाजिब मूल्य दिलाने के लिए सरकारी स्तर से कोंच गल्ला मंडी परिसर में धान क्रय केन्द्र खोला गया है। संभागीय खाद्य नियंत्रक नरेन्द्रकुमार ने बुधवार को उस केन्द्र का भी निरीक्षण किया। केन्द्र तो उन्हें काम करता मिला लेकिन खरीद अभी तक एक दाने की भी नहीं हो सकी है जिससे केन्द्र की उपादेयता पर ही सवालिया निशान लगना लाजिमी है। आरएफसी ने बताया कि पच्चीस किसानों ने अपने पंजीकरण कराए हैं लेकिन कोई किसान केन्द्र पर धान बेचने नहीं लाया है। इस दौरान विपणन अधिकारी राजीव सिंह भी मौजूद रहे।

 

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