
उरई । अंबेडकर महासभा जालौन द्वारा भारत की प्रथम महिला शिक्षिका राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले का जन्म दिवस गुरुवार को मैत्री बुद्ध विहार बघौरा में मनाया गया जिसमें राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले के द्वारा किए गए महिला शिक्षा व सशक्तिकरण पर कार्य को नमन व याद किया गया ।
संगोष्ठी की शुरुआत में सभी पदाधिकारियों ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ,महाराज ज्योतिबा राव फूले एवं माता सावित्री बाई फूले की तस्वीरों पर माल्यार्पण कर किया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष पंकज सहाय ने कहा कि राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले स्वयं अशिक्षित थी । उनको शिक्षा देने वाले महाराज ज्योतिबा राव फूले उनके पति थे । उन्होंने अछूत समाज के लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया और रूढिवादिता के खिलाफ संघर्ष कर दलित महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले । राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले को जब स्कूल में दाखिला दिलाया तो सामंतवादी समाज ने उनका व उनके परिवार का बहिष्कार कर दिया किंतु तमाम परेशानियों को सहकर उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की ।
जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि माता सावित्री के कारण आज भारत की महिलायेँ समाज में हर क्षेत्र में अपनी शख्सियत को बुलंद कर रही हैं किंतु दुर्भाग्य है कि भारत के राजनीतिक दल उनको उचित सम्मान देने में आज भी असक्षम दिखाई पड़ते हैं ।
जिला कोषाध्यक्ष दया कुमार यादव ने कहा कि आज माता सावित्री बाई फूले को समाज को जानना चाहिए किंतु उनके तपस्वी जीवन संघर्ष को घृणित सोच के लोग इतिहास में दफन करना चाहते हैं । इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । माता फूले के संघर्ष को जन जन तक पहुंचाने के लिए अंबेडकर महासभा आजीवन प्रयत्नशील रहेगी।
वरिष्ठ नेता प्रेम नारायण अहिरवार ने कहा कि अंबेडकर महासभा जालौन महिला सशक्तिकरण के लिए जन जागरण कर माता के सपनों को साकार करने का काम सदैव करती रहेगी ।
संगोष्ठी में प्रमुख रूप से रामबाबू पाल ,सुनील सोनी,कल्लन खाँ,गुलाब पाल ,दिनेश याज्ञिक, अनिल वर्मा, मनोज सक्सेना समेत पदाधिकारी मौजूद रहे।





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