‘वंचित की आवाज बने ऊंचाई दे जो, सम पर उनको सबके लाए ऐसा नूतन बर्ष चाहिएÓ

कोंच-उरई । नगर की साहित्यिक संस्था बागीश्वरी साहित्य परिषद् की मासिक गोष्ठी में नामवर कवियों और साहित्यकारों ने नव बर्षाभिनंदन को लेकर जहां अपनी रचनाओं में नूतन बर्ष का स्वागत किया वहीं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सम सामयिक रचनाएं बांचीं।
स्थानीय द्वारिकाधीश मंदिर में बागीश्वरी साहित्य परिषद् के अध्यक्ष नंदराम स्वर्णकार भावुक की अध्यक्षता तथा भाविप के कोषाध्यक्ष प्रह्लाद कौशल के मुख्य आतिथ्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। मां बागीश्वरी के पूजन से गोष्ठी का श्रीगणेश हुआ। मुन्नालाल यादव विजय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद कवियों और रचनाकारों के काव्य पाठ का सिलसिला प्रारंभ हुआ जो देर रात तक जारी रहा। कवि दिनेश मानव ने रचना पाठ करते हुए कहा, ‘जिस्म मिटता है तो मिट जाए खुदा की मर्जी, हम नजर आएंगे दुनिया के फना होने तक।Ó नंदराम भावुक ने कहा, ‘शिकवे गिले तो दिल से भुलाना ही चाहिए, दिल से गले सभी को लगाना ही चाहिए।Ó गोष्ठी का संचालन कर रहे कवि संतोष सरल ने नव बर्ष का स्वागत कुछ इस तरह किया, ‘तम से बाहर हमें निकाले ऐसा नूतन बर्ष चाहिए, गम से बाहर हमें निकाले ऐसा नूतन बर्ष चाहिए, वंचित की आवाज बने ऊंचाई दे जो सम पर उनको सबके लाए ऐसा नूतन बर्ष चाहिए।Ó मुन्नालाल यादव ने भी नव बर्ष को लेकर रचना बांची, ‘आया लेकर नया बर्ष नई खुशियों की सौगात वो, मोहब्बत का पैगाम देकर सब हमारे साथ हों।Ó प्रेम चौधरी नदीम ने कहा, ‘दुनियादारी से दूर दीवानों की दुनिया, मस्ती में मस्त मौला मस्तानों की दुनिया।Ó कालीचरन सोनी की भी रचना सराही गई। इस दौरान अमरसिंह यादव, राजेन्द्र निगम, चंद्रशेखर नगाइच, कृष्णस्वरूप मुन्ना लोहेबाले, अर्पित वाजपेयी, संतोष राठौर, जगदीश परिहार, राजा भइया तिवारी, श्यामविहारी अग्रवाल आदि मौजूद रहे।







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