उरई  । अंबेडकर महासभा जालौन की आकस्मिक बैठक  बुधवार को जिला कार्यालय बघौरा में संपन्न हुई जिसमें आर्थिक आधार पर सवर्णों को आरक्षण देने की केंद्र सरकार की मंशा को चुनावी बताया एवं इस असंवैधानिक कृत्रिम कदम के लिए केंद्र सरकार को कोसा ।

बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष पंकज सहाय ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा आनन-फानन में सवर्ण आरक्षण बिल संसद में पेश कर पास करवाना चुनावी स्टंट मात्र है क्योंकि पूर्व में भी आर्थिक आधार पर आरक्षण को न्यायपालिका ने खारिज कर दिया था जिसका प्रमुख कारण यह है कि आरक्षण हजारों सालों से भेदभाव के शिकार हो रहे लोगों के लिए ही मंजूर किया गया था । जिससे आर्थिक आरक्षण पर बड़ी वकालत की जा सके । सरकार ने बिना किसी आयोग के गठन या किसी सर्वेक्षण के बिना जो कदम उठाया है वह लोगों को गुमराह करने वाला ही सिद्ध होगा।

जिला कोषाध्यक्ष दया कुमार जाटव ने कहा कि  मोदी सरकार के वित्त मंत्री जेटली लोकतंत्र के स्तंभ संसद में इस कानून पर झूठे तथ्यों के साथ अपनी बात रख रहे थे जो विडंबना है । यही  लोग आज तक आरक्षण को भीख करार देते चले आए हैं उन्हें आज तक नहीं मालूम कि आरक्षण का वास्तविक आधार क्या है ।  संविधान में जातियों के बंटवारे का आधार भी नहीं मालूम यह मंत्री होने के कारण बहुत ही शर्मनाक है ।

वरिष्ठ नेता सुरेंद्र विक्रम वैद ने कहा  कि सवर्णों को आर्थिक आरक्षण एक झूठा वादा कोरा आश्वासन है क्योंकि इसको न्यायिक समीक्षा से गुजरना होगा ।  वर्तमान में आर्थिक पिछड़ापन भारतीय संविधान में आरक्षण का आधार नहीं हो सकता भले सभी राजनीतिक दल अपने वोट बैंक को साधने के लिए मौन धारण कर ले लेकिन भारतीय संविधान संविधान इसकी इजाजत नहीं देता इसलिए अंबेडकर महासभा जालौन इसका विरोध करती है ।

बैठक में प्रमुख रूप से नरेंद्र प्रताप सिंह, अनिल वर्मा , कल्लू जाटव ,रामबाबू पाल आदि लोग मौजूद रहे ।

 

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