जालौन-उरई । हरी मटर के दामों में लगातार गिरावट के चलते किसानों के चेहरे से खुशी गायब। अब किसानों की फसल की उपज भी कमजोर होने से किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गया।

नगर तथा क्षेत्र में सबसे अधिक किसानों द्वारा हरी मटर की फसल की जाती है। 70 से 90 दिनों में ही आ जाने वाली हरी मटर की फसल से किसान उसकी उपज लेकर दूसरी फसल गेहूं, प्याज मेंथा आदि की खेती कर लेता है लेकिन इस बार कुदरत की मार के चलते मौसम में गर्माहट रहने से किसानों की हरी मटर की फसल में कीटों का प्रकोप  इस कदर बढ़ गया कि उसकी फसल नष्ट हो गई। किसानों की फसल की उपज न के बराबर होने तथा उसका मूल्य भी कम मिलने से किसानों की कमर टूट गई । अब किसान भुखमरी के कगार पर पहुंचता जा रहा है। ऊपर से कोहरा तथा ठंड कम पड़ने से किसानों द्वारा बोई जा रही दूसरी फसल गेहूं, बेझर आदि भी न होने की संभावना बनी हुई है।

 

 

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