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लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी एक ओर कठपुतली सांसदों को जनता के ऊपर लादे रखने की मंशा का संवरण नही कर पा रही है। दूसरी ओर दर्शन दुर्लभ इन सांसदों के चुनाव के समय अपने बीच फिर पहुंचना लोगों को गंवारा नही हो रहा। भाजपा के लिए इसकी वजह से मुश्किल स्थितियां बन गई हैं।
शुक्रवार को कौशाम्बी के सांसद विनोद सोनकर जब कुंडा क्षेत्र में पहुंचे तो लोगों ने उन्हें खरी-खरी सुना डाली। लोगों ने उनसे कहा कि चुनाव जीतने के बाद पांच साल गुजर गये तब आज पहली बार वे उन्हें शक्ल दिखाने इस क्षेत्र में आये हैं। सांसद ने इसकी सफाई देनी चाही लेकिन लोग संतुष्ट नही हुए और राजाभइया जिंदाबाद के नारे लगाकर उन्हें हूट किया।
दूसरी ओर झांसी में पार्टी द्वारा फिर से चुनाव लड़ने के लिए बाध्य की जा रहीं केंद्रीय मंत्री उमा भारती आज नाटकीय अंदाज में दिखी जिससे उनका तमाशा बन गया। उमा भारती झांसी में पार्टी के कार्यक्रम में जब आटो से पहुंची तो चर्चा करने लगे भाजपा कार्यकर्ता तक उनकी इस नौटंकी पर वितृष्णा जाहिर करने से अपने को नही रोक पा रहे थे।
बताया जाता है कि भाजपा में सत्ता का केंद्रीयकरण होने के बाद उसके नेतृत्व की यह मजबूरी बन गई है कि वह लोगों के बीच न जाने वाले और निकम्मे सांसदों को ही रिपीट करें क्योंकि वे यसमैन होते हैं जिससे नेतृत्व को मनमाने फैसले करने में विरोध का सामना नही करना पड़ता। लेकिन हवा का यह रुख देखकर नेतृत्व को सोचना पड़ सकता है क्योंकि जब सत्ता ही नही बचेगी तो मनमानी का अवसर कहां रह जायेगा। इसलिए हो सकता है कि अपने तमाम मासूम सांसदों को बदलने के लिए भाजपा नेतृत्व को मानसिकता बनानी पड़े।

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