लखनऊ । मायावती को आहत करने में कांग्रेस कोई कसर नहीं छोड़ रही । एक जमाने में मायावती और बसपा के मिशन के लिए सबसे ज्यादा समर्पित अधिकारी रहे विजय सिंह को पार्टी में शामिल करके कांग्रेस ने मायावती को फिर एक गहरा जख्म दे डाला है ।
कांग्रेस के पूरे प्रयास के वाबजूद मायावती उसे नुकसान पहुंचाने पर आमादा बनीं रही जिसके चलते कांग्रेस भी उनके प्रति कठोर हो गई । हालांकि कांग्रेस उनकी तरह उकसाऊ बयानबाजी नहीं कर रही लेकिन मायावती को सबक सिखाने का कोई मौका न चूकना उसकी रणनीति में सर्वोपरि हो चुका है ।
विजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से मायावती की साख किस कदर दरकी है इसके लिए उनके प्रोफ़ायल को जानना होगा । विजय सिंह अविवाहित हैं और बहुजन मिशन के ही खातिर उन्होने आजीवन कुंवारे रहने का व्रत अपनाया । पासी समाज के विजय सिंह के पिता धर्म सिंह कांग्रेस के बड़े नेता थे । वे उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष रहे और उनकी गणना प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के सबल दावेदारों में होती रही ।
वाबजूद इसके विजय सिंह कांशीराम के मिशन के प्रति आस्था के कारण बहिन जी के वफ़ादार हो गए । उनका समर्पण इस हद तक हो गया कि उन्होने अपना बंगला भी उनके लिए छोड़ दिया । लेकिन अंततोगत्वा अन्य मिशनरियों की तरह उन्हे भी मोहभंग का शिकार होना पड़ा ।
इसी बीच मायावती के मुख्य सचिव रहे पूर्व आई ए एस पी एल पुनिया की अपनी जगह अपने बेटे तनुजा पुनिया को टिकट देने की कोशिश पर कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को मुहर लगा दी है ।
बहराइच से कांग्रेस ने इसी कड़ी में फायर ब्रांड दलित सांसद सावित्री बाई फुले को अपना उम्मीदवार बनाया है । एक जमाने में मायावती के राइट हैंड कहे जाने वाले पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी को कांग्रेस पहले ही जालौन गरौठा भोगनीपुर संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी हैं । न केवल मायावती दलित समाज की एकछत्र नेता नहीं रहीं बल्कि चौधरी समाज की सिरमौर नेता का उनका खिताब भी बेमानी हो चुका है । यह साबित करने की कड़ी में बृजलाल को अपनी पहली ही सूची में उम्मीदवार बनाने के साथ कांग्रेस ने मेरठ में पुलिस हिरासत में अस्पताल में भर्ती चंद्रशेखर की कुशलक्षेम जानने के लिए प्रियंका गांधी को पहुँचा कर भी सटीक गेम खेल दिया है ।
एक ओर कट्टर दलित अफसर और नेता मायावती से मुंह मोड रहे है दूसरी ओर रामवीर उपाध्याय ने बसपा का दामन छोड़ने की अफवाह पर विराम लगा दिया है । यह विपर्यास दूरगामी तौर पर बसपा को किस परिणति पर ले जायेगा इसका आंकलन दिलचस्प कहा जा सकता है ।







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