
कोंच-उरई । होली के सतरंगी पर्व पर गुरुवार की दोपहर कस्बे के केलरगंज में ‘बुंदेली संस्कृति एवं लोक कला संबद्र्घन संस्थानÓ के तत्वाधान में गत बर्षों की भांति महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन में हजारों की संख्या में मौजूद मूर्खों के बीच डठूला माथे पर और टिकली ठुड्डी पर अलंकृत कर दूल्हा वेश धारण किये जैसे ही मूर्खाधिराज पधारे, मूर्खों की जमात ने उनका जोरदार स्वागत किया, पारंपरिक बुंदेली शैली में मूर्खाधिराज को पूरा सम्मान बख्शा गया। अपनी ऊल जलूल हरकतों के लिए विख्यात डॉ. पीडी चंदेरिया इस साल के महामूर्ख रहे। नगर के लब्धप्रतिष्ठ रंगकर्मी द्वय स्व. रामरूप स्वर्णकार पंकज व स्व. भवानीशंकर लोहिया बंधु को समर्पित रहा आयोजन।
मूर्खाधिराज की बारात बैंड बाजों के साथ उनके सुभाष नगर स्थित क्लीनिक से उठी और भुंजरया चौराहा, तिलक नगर नईबस्ती होकर आयोजन स्थल केलरगंज पहुंची, बारातियों ने मस्ती में झूम कर नृत्य किया। परंपरागत रूप से पिछले साढे चार दशक से अनवरत जारी इस महामूर्ख सम्मेलन में मूर्खाधिराज के साथ इलाकाई सांसद भानुप्रताप वर्मा, उरई सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, माधौगढ विधायक मूलचंद्र निरंजन, जिपं अध्यक्ष प्रतिनिधि देवेन्द्रसिंह छुन्ना, चौ. ब्रजेन्द्र मयंक, पूर्व बारसंघ अध्यक्ष विनोद अग्निहोत्री, कढोरेलाल यादव बाबूजी, भाजपा अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, महामंत्री द्वय अमित उपाध्याय, नरेश वर्मा, राजीव पटेल, कृपाशंकर द्विवेदी बच्चू महाराज, डॉ. अनिल झा, राधेलाल चंदेरिया, चतुर्भुज चंदेरिया, जितेन्द्र चंदेरिया, डॉ. अनिल सोनी लखना, सुरेश सोनी मऊरानीपुर, श्याम वर्मा दिवियापुर, धु्रव वर्मा, मानवेन्द्र यादव, मनीष बजाज, मनोज मोर, राहुल समरया आदि दर्जनों मूर्ख उनके बारातियों की पांत में मंच पर ठुंसे थे। आयोजन समिति के लोगों ने उन्हें हाथों हाथ लेकर मंच पर पधरवाया और उनके कंठ में गजरे डाल कर उन्हें अपनी मूर्खता पर खुश होने का अवसर दे डाला। आयोजक संस्था के अध्यक्ष रमेश तिवारी, उपाध्यक्ष/ प्रबंधक पुरुषोत्तमदास रिछारिया, मंत्री नरोत्तमदास स्वर्णकार, अभिषेक रिछारिया ‘पुन्नीÓ, करुणानिधि शुक्ला, सौरभ मिश्रा, पवन गौतम, ऋषि झा, आनंद पांडे, राहुल राठौर, सूर्यदीप सोनी, अतुल शर्मा, बंटी गिरवासिया, अनिल पटेल, प्रवीण सिंघल आदि ने मूर्खाधिराज के गले को कंठहारों से इतना भर दिया कि वे खुशी के मारे दूनर हो हो गये। संचालन श्रेष्ठ रंगकर्मी संजय सिंघाल व डॉ. मृदुल दांतरे ने संयुक्त रूप से किया।
इस दौरान मूर्खाधिराज डॉ. पीडी चंदेरिया ने इस परंपरा को कोंच की विरासत बताते हुये कहा कि होली जैसे अन्य पर्वों पर भी लोगों को आपसी बैमनस्यता त्याग कर, अपने अंदर की बुराइयों को जला कर, खुद प्रसन्न रहने और दूसरों को प्रसन्न करने की कला जिसने सीख ली वही पर्वों के सही महत्व को जान सकता है और दूसरों को भी बता सकता है। मंचस्थ अन्य अतिथियों ने कहा कि होली का त्योहार रंगों और उमंगों का त्यौहार होने के नाते लोग अपने पुराने गिले शिकवों को भुला कर एक नये युग की शुरूआत करें और ऐसा समाज बनायें जिसमें सभी एक दूसरे की चिंता करते हों। इस तरह के आयोजन सामाजिक एकता और समरसता के संवाहक होते हैं जिन्हें निरंतर गतिमान रहना चाहिये। बाकई इस आयोजन को देख कर ऐसा लगा कि उन तथाकथित बुद्घिजीवियों जो समाज को बांटने में अपनी काबिलियत समझते हैं, से यह मूर्खों की जमात सौ गुनी अच्छी है जो कम से कम हिल मिल कर रहने का संदेश देकर अमन और समरसता को बढावा देने का काम करती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिवंगत रंगकर्मी द्वय के चित्रों पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्घाप्रसून समर्पित कर किया गया। मूर्खाधिराज ने राधा-कृष्ण की झांकी का पूजन कर कार्यक्रम को गति प्रदान की। स्वागत सत्कार जैसी बेवकूफियों से निपटने के बाद जब हंसाने और गुदगुदाने का दौर शुरू हुआ तो वहां जमे हजारों मूर्ख घंटों ठ_ा करते रहे और खीसें निपोरते रहे। हास्य और प्रहसन के दौर में जहां मूर्खाधिराज से जुड़े अतीत को कुरेद कर उनकी पोलें खोली गई, वहीं मंच पर विराजे अन्य छोटे बड़े मूर्खों को लेकर भी गजब की व्यंग्यिकायें परोस कर माहौल को खुशगवार बनाये रखने का पीठ ठौंकू प्रयास किया गया। महिला व अन्य पात्रों में अतुल शर्मा, अभिषेक रिछारिया, सूर्यदीप सोनी आदि ने अपने चरित्रों में जमकर जान फूंकी। जालौन से आए कवि महेन्द्र पाटकार मृदुल, ओंकारनाथ पाठक, भास्कर माणिक्य, श्यामजी लोहिया, शिक्षक कमलेश निरंजन, क्षितिज चंदेरिया, नन्हें व्यंग्यकार अक्षत रिछारिया ने व्यंग्य बांचे। इस दौरान सीओ शीशराम सिंह, कोतवाल ललितेश नारायण त्रिपाठी, एसएसआई दिलीप वर्मा, सुनील लोहिया, मोहनदास नगाइच, संतोष तिवारी, हरिश्चंद्र तिवारी, नरेन्द्र मयंक, विक्कू शुक्ला, प्रभुदयाल गौतम, ओमप्रकाश उदैनिया, शैलेष सोनी, किशोर यादव, सांसद प्रतिनिधि अनिरुद्ध मिश्रा, विनोद पांडे, अमित यादव, विशाल गिरवासिया, धर्मेन्द्र राठौर, छोटू टाइगर, कोतवाली के दरोगा दामोदर सिंह, एसआई वीरेन्द्र सिंह, एसआई सत्येन्द्रकुमार द्विवेदी, रामकुमार अग्रवाल सुरेन्द्र, मुनीशचंद्र शुक्ला, प्रमोद अग्रवाल, दयानिधि शुक्ला, ललूस यादव सहित तमाम अच्छे भले मूरख वहां मौजूद रहे।







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