झांसी। केंद्रीय मंत्री उमा भारती के चुनाव से पीछे हट जाने के कारण उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में भारतीय जनता पार्टी के हाई कमान को प्रत्याशी चयन में उधेड़बुन की स्थिति झेलनी पड़ रही है। इस अंचल में लोकसभा की चार सीटें हैं जिनमें से एक सुरक्षित है। चारों सीटों पर पार्टी की नीति जातिवार बटवारा करने की है। जालौन-गरौठा भोगिनीपुर सुरक्षित सीट सहित दो सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। अगर झांसी में उमा भारती डटी रहती तो बांदा-चित्रकूट में भी भैरो प्रसाद मिश्र को बहाल रखा जाता। लेकिन अब समीकरण पलट गया है।
उमा भारती के स्थान पर भाजपा हाईकमान गंगाचरण राजपूत के लिए उनकी संस्तुति को महत्व देने की बजाय ब्राहमण उम्मीदवारों को वरीयता दे रहा है। लेकिन ब्राहमण दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। जिनमें पूर्व सांसद विश्वनाथ शर्मा के पुत्र अनुराग शर्मा, विधायक रवि शर्मा और महोबा के विधायक राकेश गोस्वामी प्रमुख हैं।

 

 

झांसी में ब्राहमण प्रत्याशी को मौका दिये जाने पर बांदा-चित्रकूट में भैरो प्रसाद मिश्र का टिकट कटना तय हो जायेगा। यहां कुर्मी समाज के नेता को जातिगत संतुलन के लिए टिकट दिया जायेगा। झांसी की उठापटक के चलते बांदा-चित्रकूट का नाम भी अधर में लटका हुआ है।

 


गौरतलब है कि झांसी में सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस दोनों ही के प्रत्याशी पिछड़ा समुदाय से हैं। उमा भारती की संस्तुति को खारिज किये जाने के पीछे एक वजह यह भी है। जबकि बांदा में समाजवादी पार्टी ने सवर्ण उम्मीदवार श्यामा चरण गुप्त को मौका दिया है। कांग्रेस ने ददुआ के भाई बालकुमार पटेल पर दांव लगाया है। लेकिन भाजपा कांग्रेस के टिकट पर उन्हें गंभीर नही मान रही।

 

खास बात यह है कि कांग्रेस ने बुंदेलखंड की तीनों अनारक्षित सीटों पर पिछड़े प्रत्याशियों को मौका दिया है जो कि पार्टी के इतिहास में बड़े बदलाव का संकेत है। इसी के साथ बुंदेलखंड से सटी हुई कानपुर की एक सीट पर पूर्व सांसद राजाराम पाल को उम्मीदवार बनाया है। अगर कांग्रेस का बैकवर्ड कार्ड इस इलाके में फलीभूत हो गया तो भाजपा के साथ-साथ सपा-बसपा गठबंधन का आधार दरकने की नौबत भी यहां आ सकती है।

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