
उरई। मुसाफिर हूं यारों न घर है न ठिकाना, चलते जाना है बस चलते जाना, काम के लिए भटकते हुए आये मजदूरों को घर वापिसी के समय कुछ ऐसे ही गीत गुनगुनाने पड़ रहे हैं लेकिन डिप्टीगंज चैकी के इंचार्ज की सहजता से टीकमगढ़ से जिले में आये मजदूरों के लिए सुहाने सफर के साथ अपना ठिकाना नसीब होने के आसार बन गये।
टीकमगढ़ से मटर काटने आये लगभग 80 मजदूर कोरोना के कारण हुई भारतबंदी में फंस गये। मंगलवार को वे जालौन से पैदल ही अपने ठिकाने के लिए निकल पड़े। उरई आने पर झांसी चुंगी बाईपास पर लोगों ने उनका हुजूम देखा तो डिप्टीगंज चैकी इंचार्ज संतराम कुशवाहा को फोन कर दिया। सुनते ही चैकी इंचार्ज हमराज सिपाहियों रिंकू और मनीष को लेकर उन्हें रोकने मौके पर पहुंच गये।

मजदूरों का नसीब अच्छा था जो खाकी के अंदर एक इंसान से उनका सामना हुआ। उनकी कहानी सुनकर पसीजे चैकी इंचार्ज ने पहले उनके लिए लंच पैकिट की व्यवस्था कराई। इसके बाद एक ट्रक में बिठाकर उन्हें टीकमगढ़ की ओर रवाना कराया साथ ही ट्रक का किराया भी खुद वहन किया और मजदूरों को अपना मोबाइल नम्बर देकर कहा कि पुलिस कहीं परेशान करे तो उनकी बात करा देना।







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