
उरई। जब परीक्षा का अवसर आता है तो मिट्टी का यह पुतला यानी मानव ही देवदूत का अवतार लेता है। कोरोना के प्रलंयकारी संकट के इस युग में यह धारणा चरितार्थ हो रही है। फरिश्तों के अवतार की इस कड़ी में एक नाम प्रसिद्ध समाजसेवी जलील मुम्बई का भी नाम जुड़ गया है।
जलील मुम्बई ने अपनी मेहनत और व्यवसायिक कौशल से सिफर से शिखर पर पहुंचने का सफर तय किया है। कभी वे खुद दूसरों की मदद के मोहताज रहते थे लेकिन आज मुम्बई में उनका बड़ा शिपिंग कारोबार है। मुकद्दर ने उनका भरपूर साथ देने के साथ-साथ यह भी सिखाया है कि फलदार वृक्ष की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि उसे झुकना आता है। जलील में भी बुलंदियों पर पहुंचने के बाद दया और विनम्रता के गुण जैसे फूट पड़े हैं।
कोरोना के कारण एहतियातन की गई देशबंदी में सर्वहारा वर्ग हाहाकार कर उठा क्योंकि खाने तक के लाले पड़ गये। ऐसे में सक्षम लोगों की करूणा और दानशीलता ने लोगों को कष्ट से उबारा। जलील मुम्बई भी इसमें पीछे नहीं रहे। वे प्रतिदिन खाना बनाने की आवश्यक सामग्री जिसमें 25 किलो आटा, दाल, चावल, नमक, तेल, मसाले आदि शामिल हैं। दर्जनों परिवारों को वितरित कर रहे हैं। उनके कार्य से दूसरों को भी प्रेरणा मिल रही है। जिससे मोहताजों की मदद में हाथ बंटाने के लिए कड़ी से कड़ी जुड़ती चली जा रही है।





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