उरई। उत्तर प्रदेश पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह के निजी कार्यों में लगे सफाई कर्मचारियों को गावों में मूल डयूटी के लिए भेजने के आदेश से यहां भी विभाग में खलबली मच गयी है। हालांकि जिले में पहले से ही इस मामले में मौजूदा डीपीआरओ ने सख्ती कर रखी है।
सूत्रों के अनुसार जिले में 110 सफाई कर्मचारी पहले साहबों की खुशामद की डयूटी लगवाये हुये थे ताकि उन्हें सडक सफाई और नाली की गंदगी हटाने जैसे अछूत काम से छुटकारा जारी रहे । दरअसल सरकारी नौकरी हथियाने के चक्कर में कई ऐसे वर्ग के नौजवान सफाई कर्मचारी के रूप में भर्ती हो गये थे। जिनके यहां पुरखों से सफाई को घृणित कार्य के रूप में देखा जा रहा था। ऐसे लोग सफाई कर्मचारी बन तो गये पर इनसे सफाई का कार्य कराना अधिकारियों के लिए बडी चुनौती बना रहा ।
ऐसे सफाई कर्मचारी अपनी डयूटी बदलवाने के लिए अच्छा खासा खर्चा भी करते थे। पर ईमानदार जिला पंचायत राज अधिकारी अभय कुमार के कार्यभार संभालने के बाद इन सफाई कर्मचारियों के लिए तथाकथित अछूत कार्य से बच निकलना मुश्किल हो गया । जिले के कुल 1105 सफाई कर्मचारियों मंे से 110 अभय कुमार के कार्यभार संभालने के समय गैर सफाई डयूटी कर रहे थे। उनकी सख्ती के बाद इनकी संख्या 30 -35 रह गयी । इनमें से कुछ सफाई कर्मचारी उनसे बडे साहबो की टहल में थे जिसके कारण उन्हें झेलना डीपीआरओ की मजबूरी थी। 57-58 कर्मचारी ऐसे भी थे जो अपने ही गांव में डयूटी लगवाये हुये थे। डीपीआरओ अभय कुमार ने इनकी मस्ती भी गांव बदलकर दूर कर दी।
उम्मीद है कि बचे खुचे सफेदपोश सफाई कर्मी भी अब पंचायती राज निदेशक के आदेश के बाद बडे साहबों के दामन में सिर छिपाकर नहीं रह पायेंगे । जिला पंचायत राज अधिकारी ने कहा है कि निदेशक महोदया का आदेश कडाई से अमल में लिया जायेगा। यानि सफेदपोश सफाई कर्मचारियों को भी अब झाडू और फावडा उठाना ही पडेगा।

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