उरई। लाॅक डाउन के कारण सारे काम काज ठप्प पड गये है। जिससे मजदूरों पर बुरी बीत रही है। चार सौ रूपये रोजनदारी से कम पर न मानने वाले मजदूर मोलभाव में सौ रूपये के रेट तक गिर जा रहे है।
कोरोना के आतंक ने मजदूरों के अस्तित्व को अंधेरे में घेर दिया है। इस वर्ष मजदूरों को लगभग आधी मजदूरी पर खेत काटने पडे। अब उनके सामने जितना मिल जाये उतना ही बहुत है, की हालत है। मजदूरों के घरों में खाने के लाले पडे है, अन्य व्यवस्थाओं की बात तो दूर है। यह भी तय नहीं है कि ऐसे हालात कब तक चलंेगे। अभी कई महीने फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से नहीं चल पायेंगी। इसलिए उन्हें वापस यथावत काम मिलने की उम्मीद लम्बे समय तक नजर नहीं आ रही।
इसी बीच लखनऊ मंे प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग ने आदेश जारी कर दिया है कि गांव लौट चुके लोगों को मनरेगा के तहत जाॅब कार्ड बनाकर उनके गांव में काम दिया जाये। इसके चलते नये जाॅब कार्ड लाॅक डाउन में ढील के बाद बनने शुरू होगें।
उधर नई दिल्ली मंे एक रिपोर्ट के अनुसार देश में मई के तीसरे सप्ताह तक कोरोना का जोर थमने की आशा नहीं है। इस रिपोर्ट से लोगो में बेचैनी और बढ गयी है। केन्द्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यों में निर्देश दिये है कि मजदूरों के लिए बनाये गये कंट्रोल रूम से समन्वय के लिए श्रम विभाग मंे एक नोडल आफिसर बनाये।







Leave a comment