सूचना के चौबीस घंटे बाद विद्यालय में हुई भोजन की व्यवस्था, बिस्तर फिर भी नसीब नहीं
कदौरा। कोरोना संक्रमण बचाव को लेकर शासन प्रशासन दिन रात जुटे हुए हैं जिसमें बाहर से आने वालों को गांव नगर में क्वारंटीन सेंटर में रखा जा रहा है जिससे सावधानी बनी रहे लेकिन जनपद में एक गांव ऐसा भी है जहां महाराष्ट्र से लौटे लोगों को अड़तालीस घंटों में भोजन बिस्तर कुछ नसीब नहीं हुआ और पूछने पर सचिव बोली सब कागजों में मेंटेन है।
गौरतलब हो कि सरकार द्वारा दी जाने वाली जिम्मेदारी अगर गलत कंधों पर पड़ जाए तो व्यवस्थाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं। कुछ यही हाल कदौरा ब्लाक का भी है जहां ग्रामीणों की सूचना पर टीम द्वारा ग्राम पंचायत सुरौला का निरीक्षण किया गया तो सब हैरतअंगेज था। ग्राम के प्राथमिक विद्यालय में 29 अप्रैल की रात दो बजे महाराष्ट्र से लौटे नौ लोगों जिसमें महिला व पुरुष दोनों हैं उन्होंने बताया कि उन्हें जिस प्राथमिक विद्यालय में ठहराया गया है वहां अड़तालीस घंटों से भोजन नहीं दिया गया। विद्यालय में गंदगी पसरी हुई है और किसी के लिए बिस्तर तक नहीं है। प्रधान कालपी में रहते हैं जो केवल स्कूल में ठहराकर फिर देखने भी नहीं आए और सचिव भी नहीं आए। कोई कुछ देखने सुनने वाला नहीं है। उक्त संबंध में जब सचिव विजया रत्नम से बात की तो अधिकारी द्वारा साफ झूठ बोलते हुए कहा कि सबको भोजन मिल रहा है सब कागज में मेंटेन है। उन्हें ये भी नहीं पता कि सेंटर में कितने लोग हैं। वहीं जब बीडीओ अतिरंजन सिंह से बात की गई अतिरंजन सिंह से कहा गया तो उन्होंने कहा कि वह उक्त लोगों की व्यवस्था करवाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि प्रधान महेवा ब्लाक की हैं जिन पति पत्नी के पास महेवा व कदौरा ब्लाक की दोहरी प्रधानी है जो गांव में ध्यान ही नहीं देते हैं। वहीं सचिव भी कभी गांव की ओर रुख नहीं करती। सूचना के चौबीस घंटे बाद शनिवार की सुबह उक्त विद्यालय में प्रधान द्वारा भोजन व्यवस्था की गई लेकिन क्वारंटीन लोगों को बिस्तर फिर भी नसीब नहीं हुए।

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