हर गांव में सैकड़ों फर्जी जाब कार्ड, मनरेगा धन की निकासी लगातार जारी
क्षेत्र के गांवों में लघु सिंचाई विभाग के कार्यों में गरज रही पोकलैंड मशीनें
कदौरा। एक तरफ गांवों में मजदूरों का पलायन रोकने व उन्हें रोजगार देने के लिए मनरेगा के तहत कार्य देने का प्रावधान है लेकिन उक्त ब्लाक में प्रधान यही मनरेगा की रकम थोड़ी बहुत मजदूरों के हिस्से में बाकी धनराशि का बंदरबांट करने में लगे हैं और ब्लाक में मीटिंग की औपचरिकता जारी है।
गौरतलब हो कि 71 ग्राम पंचायतों के विकास खंड कदौरा में मनरेगा की स्थिति पूर्व की तरह बदतर है जहां लाक डाउन में घर बैठे मजदूरों को मनरेगा के तहत काम ही नहीं मिल रहा है लेकिन मनरेगा से धन की निकासी व कार्य कागजों में बदस्तूर जारी है। शुक्रवार को विकास खंड में बीडीओ अतिरंजन सिंह द्वारा समस्त सचिव अन्य ब्लाक अधिकारियों से बैठक करते हुए कहा गया कि ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य में तेजी लाएं एवं पेयजल जैसी समस्याओं पर ध्यान रखें। साथ ही क्वारंटीन सेंटर पर भी ध्यान रखें व निगरानी समिति के जरिए संक्रमण में रोकथाम कार्य जारी रखें। अब निर्देश देने भर से केवल काम  पूर्ण नहीं होगा इस पर अमल भी होना चाहिए। प्रत्येक बैठक में इन्हीं निर्देशों के बावजूद गांवों में हालात जस के तस हैं। मजदूरों को मनरेगा के तहत काम मिल ही नहीं रहा जबकि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बड़े पैमाने पर जाब कार्ड धारकों की संख्या है जिसमें आधे कार्डधारक कभी काम पर ही नहीं गए लेकिन बिना काम किए उनके खातों में मजदूरी बराबर जारी है। लाक डाउन में ग्राम पंचायतों में मजदूर परिवारों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है जिनके पास सभी आय के स्रोत बंद होने के कारण एक मात्र मनरेगा ही साधन है लेकिन सरकारी धन के बंदरबांट का जरिया बनी मनरेगा योजना ब्लाक अधिकारी व प्रधानों व कुछ एक्टिव मजदूरों के लिए ही वरदान साबित हो रही है। ग्राम पंचायत खुटमिली, कठपुरवा, चंदरसी सहित अधिकांश गांवों में मजदूरों के बदतर हालात हैं। वहीं अब तालाब सौंदर्यीकरण में ब्लाक क्षेत्र के कई गांवों में जारी खुदाई कार्य में पोकलैंड मशीन मजदूर के पेट में लात मार रही है।

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