उरई। गत 18 जून को मुहल्ला गणेशगंज में दो कोरोना पाॅजिटिव व्यक्ति पाये गये। इसके मद्देनजर तय गाइडलाइन के अनुसार लाइफ लाइन हास्पिटल से लालजी चाट वालों तक तथा सम्पूर्ण सर्राफा मार्केट एवं चूड़ी मार्केट (जहां अत्यधिक भीड़ रहती है) पूर्ण रूप से बन्द करने का आदेश जारी कर दिया गया था ।
पर आज अचानक प्रशासन ने सील किये हुये इलाके में परिवर्तन करके चूड़ी मार्केट, सर्राफा मार्केट एवं कुछ हिस्सा बजरिया का खोल दिया। आखिर इतना बड़ा परिवर्तन अधिकारियों ने किस वजह से किया। वजह सबको मालूम है | कुछ बडे नेताओं एवं बड़े दुकानदारों के घर एवं प्रतिष्ठान उसी इलाके में आते थे नतीजतन अधिकारियों को घुटने टेकने पड़ गए |
वउधर बम्बी रोड, गोपालगंज जहां 9 जून को एक कोरोना पाॅजीटिव लड़की पायी गयी थी, जिसकी वजह से यहां इस इलाके को निर्धारित 250 मी0 के काफी आगे कौंशल मार्केट तक सील कर दिया गया था, जबकि कौंशल मार्केट,जो मौनी मन्दिर के पीछे है वह उस स्थान से काफी हद तक दूर है जहां पर केस निकला था। कौंशल मार्केट में सब छोटे दुकानदार हैं जिनकी रोजी रोटी प्रभावित हो गयी पर उनकी मार्मिक गुहार को सुनने की जहमत अधिकारियों ने नहीं उठाई।
बताया जाता है कि बातचीत के दौरान दुकानदारों की अधिकारियों से हाट टाक भी हो गयी | कहा गया कि प्रशासन बल्ली लगवाता है और तुम लोग उखाड़ देते हो, कौंशल मार्केट के सभी दुकानदारों के ऊपर मुकदमादर्ज कराये जाएंगे ,| 21 के पहले कोई दूकान नहीं खुलने दी जायेगी |
अब सवाल उठता है कि जब कौंशल मार्केट नहीं खोला गया तो सर्राफा मार्केट, चूड़ी बाजार एवं कुछ बजरिया का हिस्सा क्यों खोला? अब सरकार की गाइड लाइन का उल्लंघन क्यों किया गया? यदि कोई मरीज निकलता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? और अगर दुकानदारों की रोजी रोटी के हिसाब से खोला गया तो कौंशल मार्केट क्यों नहीं खोला?
प्रशासन के उक्त भेदभावपूर्ण रवैये से कौंशल मार्केट के दुकानदार खासे नाराज दिखे और नाराजगी उन नेताओं के लिये भी थी, जिन्होंने कौंशल मार्केट के लिये तवज्जों नहीं दिखायी। परन्तु सर्राफा वालों के बड़े प्रतिष्ठान तथा कुछ नेताओं के घर उक्त कन्टेन्मेंट एरिया में आ रहे थे तो फौरी कार्यवाही करके एरिया खुलवा दिया, और प्रशासन ने भी सरकार की गाइड लाइन का उल्लंघन कर उक्त एरिया खोल दिया जो प्रशासन के नितान्त भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है।
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