गत रविवार को सोशल मीडिया पर फादर्स डे की धूम मची रही।
विश्व गुरू का सपना देख रहा भारत व्यवहार में बटुक के दर्जे पर है। पितृ वंदना, मातृ वंदना, मित्र प्रेम इत्यादि का शऊर वह इतनी प्राचीन सभ्यता से गुजरने के बावजूद अब बाहर के लोगों से सीख पा रहा है। क्योंकि फादर्स डे, मदर्स डे, फ्रेंडशिप डे आदि मनाने की परंपराएं एकदम नई हैं। वैसे ये परंपराएं विश्व बाजार की देन हैं। जहां भारत की हैसियत सिर्फ अपने लुटने का तमाशा देखने की है।
लगता है कि चीन को भारत से पैदाइशी रंजिश है ऐसे लोग का कोई इलाज नही होता। ऐसे चीन की अनौपचारिक यात्रा पर जाकर वहां के नेताओं के साथ गलबहियां करने के प्रदर्शन से अपने लोगों पर रुतबा तो जमाया जा सकता है लेकिन इस बौरायेपन के चलते देश को बहुत बड़ी कीमत अदा करने की नौबत आ गई है।
जरूरत चीन जैसे शत्रु की खासियतों और कमजोरियों का पता लगाने की है तांकि अपने खिलाफ उसके दांव-पेंचों की काट तैयार रखी जा सके। 1948 में चीन में जनक्रांति हुई यानि भारत की आजादी के एक वर्ष बाद। लेकिन आज चीन कहां हैं और भारत कहां है।
कुछ वर्ष पहले चीन ने आदेश जारी किया था कि उसके यहां न तो क्रिसमस पर छुटटी होगी और न इसका कोई जश्न मनेगा। इस आदेश पर उंगलियां उठी तो चीन ने कहा कि दूसरों के त्योहार मनाने से उसके परंपरागत त्योहार प्रभावित हो रहे हैं इसलिए ऐसा कदम उठाना लाजिमी है।
चीन को उसकी यही अदा इतना आगे ले गई। अपने को सबसे आगे रखने की किलर स्टिंक्ट जैसी भावना जगाने के लिए छोटी-छोटी बातों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जो मनोविज्ञान के सिद्धांतों के अनुरूप है।
दूसरी ओर हम हैं जो लंबी गुलामी के कारण अपना अस्तित्वबोध गवां बैठे हैं। अनुकरणवाद हमारी नियति बन चुका है जो हमारी हीन भावना को दर्शाता है। यह मानसिकता आत्मविश्वास के लिए बेहद घातक है। अनुकरणवाद छूट सके इसके लिए सिरफिरेपन की हद तक जाने की जरूरत है। हमारी संस्कृति में बड़ों के आदर, अभिनन्दन की शिक्षा क्या कम है फिर हम दूसरों के इशारों पर क्यों नाचें। पितृ वंदना करनी है तो पुरखों के दिनों या श्रवण कुमार की जयंती का अवसर क्यों न तय कर लें। अपने उल्लास के प्रकटन के लिए केक काटने की क्या जरूरत है। हमारे यहां तो आत्मीय और पारिवारिक त्योहार गुलगुले खाकर मनाये जाते हैं। क्यों न हम अपने श्रेष्ठताबोध के लिए गुलगुले और खड़पुड़ी का झंडा गाड़ने पर अड़ें।
चीन ने क्रिकेट को पहले ही दिन छोड़ दिया था। क्योंकि यह खेल औपनिवेशिक शासन से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्वाभिमान के विरुद्ध था। यह बात हम पर भी तो लागू होती है। क्रिकेट केंद्रित खेल नीति ने देश का कोई भला नही किया क्योंकि खेलों के प्रोत्साहन का संबंध देश के आम लोगों के स्वास्थ्य संवर्द्धन से है। जो देश जिम्नास्ट को प्राथमिकता देते हैं उनके पेशेवर खिलाड़ी ओलंपिक में पदक बटोरते हैं लेकिन आम लोग भी सेहतयाब रहकर लाभान्वित होते हैं। यानि देश की पूरी नस्ल को सही खेल नीति मजबूत करती है। दूसरी ओर क्रिकेट से दौलतमंदी के चंद पहाड़ भले ही खड़े होते हों लेकिन आम लोगों के लड़कों की बर्बादी होती है क्योंकि चिलचिलाती गर्मी में क्रिकेट की कवायद उनकी सेहत पर बहुत भारी पड़ जाती है।
फेसबुक पर अपने देश और संस्कृति के गौरव के लिए दिखाया जाने वाला अभिमान बहुत थोथा है। प्रैक्टिस में जब तक उसकी झलक नही आयेगी ऐसे उफान की कोई सार्थकता नही होगी।
बाहरी चकांचौंध देखकर गिर पड़ने के स्वभाव में ही हमें चीन के दलदल में इतने गहरे तक धसा दिया है कि उसकी शत्रुतापूर्ण हरकतों के बावजूद हम उसे सिर पर बिठाये रहने को मजबूर हैं। उसके सामान और सेवाएं हमारी जरूरत बन चुके हैं। चीन के बहिष्कार की लाख घोषणा के बावजूद अपनी व्यवस्था लड़खड़ा जाने के डर से हम उसके आगे मजबूर हैं।
अगर सिरफिरापन होता तो हम आधी रोटी खा लेते पर विदेशी साजो-सामान और सेवाओं पर आश्रित नही होते। साथ ही अगर हमने अपने आत्म विश्वास को मजबूत किया होता तो जिस तकनीक व प्राद्योगिकी की आवश्यकता होती उसमें हम खुद ही निपुण हो जाते।
अनुकरण वाद हमारा दिमाग नही चलने दे रहा। अफसोस यह है कि हमारे नेता तक विदेशी वैभव को ओढ़ने में गर्व महसूस करके अनुकरणवाद को मजबूती दे रहे हैं तो आम आदमी उसके आकर्षण से कैसे बचे।
पर अब समय आ गया है जब छोटी-छोटी बातों में नई शुरूआत करके एक बड़ी लकीर खींचें जो वास्तिविकता के अनुरूप होगा। पूरी दुनियां जहां की प्रतिभाओं की सेवाएं लेने को लालायित हो वह देश सचमुच महान बन चुका है इसलिए उसे शोभा नही देता कि वह ऐरों-गैरों की बीन पर नाचे। राष्ट्रीय गौरव के मामले में अपने घमंड को मजबूत करने पर कई और बदलाव होगें जिनकी दरकार है। लोगों को देश की महानता दरकाने से परहेज होने लगेगा जो कर्तव्यहीनता से उबारने में सबसे बड़ा योगदान सिद्ध होगा। ऐसी शुरूआत के लिए सरकार का मुंह तांकने की कोई जरूरत नही है। नागरिक स्वयं यह शुभारंभ अधिक सफलतापूर्वक कर सकते हैं। तो आगे आयें इस दिशा में कुछ करने के लिए।

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