जालौन। डाक्टर धरती पर भगवान का दूसरा रूप होते हैं। खास तौर पर भारतीय समाज में डाक्टर का सम्मान, भगवान से भी बढक़र किया जाता है। आखिर एेसा क्यों इसके जवाब में नगर के युवा पुष्पेंद्र यादव, प्रतीक चंसौलिया, कपिल गुप्ता, अफजाल अहमद, अकरम सिद्दीकी आदि का कहना है कि भगवान तो हमें एक बार जीवन दे देता है परंतु उसके बाद डाक्टर ही हमारे जीवन को बार बार बचाता है। सेवा भावना के जरिए डाक्टर ही स्वस्थ समाज के निर्माण में अहम भूमिका अदा करते हैं। कोरोना महामारी के बीच डाक्टरों ने जिस तरह से अपने कार्य को अंजाम दिया है वह वाकई में प्रशंसनीय है। डाक्टरों के इसी समर्पण और सेवाभाव को याद करते हुए भारत में 1 जुलाई को डाक्टरों के सम्मान में डाक्टर्स डे मनाया जाता है।
डाक्टर्स डे को लेकर पूर्व चिकित्साधिकारी डा. एमपी सिंह ने बताया कि सन 1882 में आज ही के दिन बिहार में जन्मे महान चिकित्सक एवं पश्चित बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डा. विधान चंद्र राय के जन्मदिवस को डाक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है। इतना ही नहीं डा. राय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे जिन्होंने आजादी के बाद अपना संपूर्ण जीवन रोगियों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि डाक्टरों को अपने विचार और आदर्श डा. राय जैसे करने होंगे तभी हमारा डाक्टर्स डे मनाना सही साबित होगा। नगरीय स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. सहन बिहारी गुप्ता, डा. अंकुर शुक्ला, महिला चिकित्सक डा. अनुपमा पाल  कहती हैं कि वर्तमान में डाक्टर ही हैं जिन पर प्रत्येक व्यक्ति विश्वास करता है। रोगी व्यक्ति अपने जीवन की बागडोर डाक्टर को ही सौंप देता है। अब इस विश्वास को बनाए रखने की जिम्मेदारी हम डाक्टर्स की ही है। डा. आलोक गुर्जर, डा. बृजेंद्र दुबे, डा. रंजना दुबे, डा. वेद शर्मा, डा. एसके सिंह का कहना है कि डाक्टर होना सिर्फ एक काम ही नहीं है बल्कि चुनौतीपूर्ण वचनबद्धता है। डाक्टर्स डे के मौके पर हम सभी डाक्टर्स को मौका मिलता है कि हम अपने अंतर्मन में झांकें और अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने के साथ ही इसे व्यवसायिक पेशा न बनाकर मानवीय सेवा का जरिया बनाएं।

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